उझानी (बदायूं)। पिछले दिनों पकड़े गए हरियाणा के शराब लदे वाहन के दो नंबर प्लेट के आधार पर तस्दीक करने में जुटी पुलिस के सामने नोएडा और बुलंदशहर से जो हकीकत सामने आई, उससे साफ हो गया है कि धंधेबाजों ने बड़ा ही शातिर दिमाग का इस्तेमाल किया। डाक विभाग वाहन के आगे अंकित नंबर नोएडा की टाटा-407 का था जिसे बाद में बुलंदशहर में बेच दिया गया। जबकि पीछे की नंबर प्लेट पर जो नंबर है, उसी नंबर पर नोएडा में कार पंजीकृत है।
बदायूं की इंटेलीजेंस स्पेशल टीम और कोतवाली पुलिस ने 12 सितंबर को डाक विभाग लिखे वाहन से हरियाणा की शराब की करीब 120 पेटियां बरामद की थीं। शराब लदे वाहन पर दो नंबर प्लेट थीं, जिससे उसके असली नंबर को लेकर पसोपेश का माहौल बन गया था। पुलिस के मुताबिक-शराब लदे वाहन के आगे यूपी-16 एटी-6761 लिखा था। इस नंबर पर नोएडा की शैलेष गुप्ता पत्नी विपुल कुमार के नाम से टाटा-407 का रजिस्ट्रेशन है। शैलेश ने टाटा-407 को पिछले महीना में बुलंदशहर निवासी अली हसन पुत्र सुबराती के हाथों बेच दिया था। अली हसन के पास पुलिस पहुंची तो उसे टाटा-407 के लिए दिखा भी दिया। इसके अलावा पकड़े गए वाहन के पीछे लगी नंबर प्लेट के आधार पर तहकीकात के दौरान पुलिस को नोएडा में मनोज चौहान की कार मिली है। कार का नंबर यूपी-16 एटी-6161 है। इससे यह तो साफ हो गया है कि धंधेबाजों ने डाक लिखे वाहन पर फर्जी नंबर का इस्तेमाल किया है। उसके चेसिस और इंजन नंबर से भी छेड़छाड़ की गई है। दोनों ही स्थानों पर नंबर स्पष्ट नहीं हैं।
किसी बड़े गिरोह का हाथ होने की आशंका
उझानी। हरियाणा के शराब लदे वाहन के बारे में शुक्रवार को हकीकत सामने आने के बाद सबसे अहम सवाल यह उठ रहा है कि पुलिस ने गिरफ्तारी के समय चालक और हेल्पर से पूछताछ में अहम बातों को नजरंदाज क्यों किया। ऐसा भी नहीं कि वाहन का चालक और हेल्पर में से कोई एक उसके मालिक के बारे में सही जानकारी नहीं रखता हो। दूसरा, यह कि पकड़े गए चालक और हेल्पर बदायूं जिले में सहसवान और उसहैत क्षेत्र के निवासी निकले थे। ऐसे में काफी हद तक शक की सुई जिले के आसपास आकर टिक जाती है। भले ही वह यह नहीं जानते हों कि शराब की तस्करी कराने वाला माफिया कौन है। ऐसा भी हो सकता है कि उनका मुंह नहीं खुलवाने के लिए पुलिस भी अंडरप्रेशर रही हो। -----------
तहकीकात तेजी के साथ की जा रही है। अब तक जो जानकारियां सामने आई हैं, उसके आधार पर वाहन का असली नंबर कोई और ही निकलेगा। वाहन मालिक का पता लगते ही धंधेबाज का भी पता लग जाएगा।
- विनोद कुमार चाहर, कोतवाल।