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...तो अधिकारी स्तर पर हुआ तीन करोड़ का खाद घोटाला!

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...तो अधिकारी स्तर पर हुआ
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तीन करोड़ का खाद घोटाला!
बदायूं। तीन करोड़ के खाद घोटाले में अब विभागीय अधिकारियों की सांसें अटक गई हैं। पहले मामला दबाने का पूरा प्रयास किया गया था लेकिन पोल खुलने पर यह अधिकारियों की गले की हड्डी बन गया है। इस मामले की सिविल लाइंस पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अब तक की जांच में तीनों चौकीदार बेकसूर माने जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि घोटाला अधिकारी स्तर पर हुआ था। माना जा रहा है कि गोदाम आने से पहले ही ट्रक गायब कर दिए गए थे।
तीन करोड़ का खाद घोटाला करीब छह दिन पूर्व प्रकाश में आया था। एक व्यक्ति ने घोटाले की भनक लगने पर सीधे डीएम से शिकायत की थी, जिस पर डीएम दिनेश कुमार सिंह ने तीन सदस्यीय टीम गठित की और मामले की जांच कराई। पता चला कि कागजों में आई खाद पीसीएफ गोदाम तक पहुंची ही नहीं। पूरी जांच में करीब तीन करोड़ की खाद गायब पाई गई। इस मामले को डीएम ने गंभीरता से लेते हुए सीधे रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए थे। मामला उजागर होने पर जिला प्रबंधक, पीसीएफ अशोक कुमार शर्मा ने चौकीदार नेम सिंह, बदन सिंह और मुनीश चंद्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में दूसरी एफआईआर बुधवार रात दर्ज हुई। यह भी अशोक कुमार शर्मा की ओर से लिखाई गई है, जिसमें गोदाम प्रभारी जगतपाल, तत्कालीन अधिकारी और परिवहन ठेकेदार आरोपी हैं। इन पर धारा 420, 409 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इधर यदि खाद घोटाले की विवेचना पर गौर करें तो खाद, गोदाम तक आई ही नहीं। कागजों में दिखाया जा रहा है कि इफको से ट्रकों में भरकर खाद गोदाम के लिए रवाना हुई थी, लेकिन तीन करोड़ की ये खाद गोदाम तक नहीं पहुंची। गोदाम में जो खाद पहले से मौजूद थी, उसका रिकॉर्ड पूरा था। यहीं से पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसी कारण पुलिस के मुताबिक तीनों चौकीदार बेकसूर माने जा रहे हैं। जो भी घोटाला हुआ है, वह अधिकारियों के स्तर से हुआ है। इसमें कई लोगों की गर्दन फंसनी तय है।
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जिस खाद का घोटाला हुआ है, वह गोदाम तक पहुंची ही नहीं। ऐसे में चौकीदार दोषी कैसे हो सकते हैं। खाद बदायूं के लिए आते समय गायब हुई थी। बीच से किसने गायब की, इसकी जांच की जा रही है।
-अनिल कुमार सिरोही, इंस्पेक्टर सिविल लाइंस
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