करीबियों ने भरोसे में लेकर कर दिया काम तमाम!
चाय की दुकान से करोड़पति बने संजय ने बना लिए थे कई दुश्मन
कई लोगों पर कराए थे मुकदमे, पुलिस सर्विलांस से खुलासे में जुटी
अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। बेहद कम वक्त में चाय की दुकान पर बैठने वाले संजय ने कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ी तो कई दुश्मन भी पैदा कर लिए। मौके के हालात और पोस्टमार्टम रिपोर्ट बता रही है कि कई लोगों पर कोर्ट के जरिये मुकदमे कराने वाले संजय को भी उसके करीबियों ने भरोसे में लेकर ही मारा है। पुलिस सर्विलांस और पूछताछ के आधार पर खुलासे में जुट गई है और जल्द ही इसका नतीजा सामने आ सकता है।
घटना के बाद जब लोगों को संजय रस्तोगी की हत्या के बारे में पता लगा तो वह चौंक उठे। इसके बाद लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आई। अधिकतर लोग उसके व्यवहार की तारीफ करते नहीं थक रहे थे तो कुछ लोग दबी जुबान बता रहे थे कि फर्श से अर्श पर पहुंचे संजय के अपने ही उससे जलन रखते थे। हालांकि संजय मेहनती थे, इसमें किसी को शक नहीं था। लोग बताते हैं कि बीएसए दफ्तर के सामने उनका पुश्तैनी चाय की दुकान थी। पहले दादा, फिर पिता और कई बरस तक संजय ने यहां बैठकर चाय बेची। संजय बिजली उपकरण सही करने के उम्दा मैकेनिक भी थे। बीएएसए कार्यालय के पास चाय की दुकान होने की वजह से संजय की दफ्तर के अंदर मजबूत पकड़ थी। यहीं नौकरी करते हुए संजय की शादी दिव्यांग कोटे से शिक्षिका बनी एकता से हुई। यहीं रहते संजय ने उझानी के कस्तूरबा विद्यालय में कई साल तक चौकीदार के पद पर काम किया। हालांकि आजाद ख्याल संजय के लगातार गैरहाजिर रहने की वजह से वर्ष 2011 में ही उसकी नौकरी खत्म कर दी गई। इसके बाद संजय ने विभाग में जड़ेें फैलाकर यूनिफार्म वितरण का ठेका लेना शुरू किया और यही उसके कैरियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। करीब छह साल में संजय की हैसियत करोड़पति वाली हो गई। हालांकि उसमें पत्नी के अच्छे पे स्केल का भी योगदान था। संजय ने किराए पर बड़ा घर ले लिया और कार भी खरीद ली। बताते हैं कि संजय ने धारा 156 (3) के तहत कई लोगों के खिलाफ मुकदमे कर रखे थे। इससे कई लोग उससे रंजिश मान बैठे थे। इनके अलावा साथ में खाने-पीने वाले साथी भी संजय की अचानक बढ़ी हैसियत से अंदर ही अंदर खिन्न थे।
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क्राइम सीन बता रहा हत्या की कहानी
बदायूं। शव और घटनास्थल को देखकर साफ लग रहा है कि संजय को कहीं और शराब या जहर दिया गया है। उसे मारकर या अचेत अवस्था में कार की पिछली सीट पर बैठी मुद्रा में लाया गया है। संजय के पैर बिल्कुल साफ थे जबकि ड्राइविंग सीट पर एक्सीलेटर में कीचड़ लगी थी। ऐसा भी लग रहा था कि यहां अचेत संजय की आसानी से गला दबाकर हत्या की हो और इसके बाद अगले गेट से ड्राइवर व हत्यारे निकल गए हों। अंदर से पहले ही बाकी गेट लॉक किए गए होंगे और आखिरी गेट निकलते वक्त लॉक कर दिया गया होगा।
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रामपुर का था मूल निवासी संजय मूल रूप से रामपुर शहर के निवासी थे। दो भाई मां लौंगा देवी के साथ रामपुर में रहने लगे तो संजय अपनी पत्नी एकता और दो साल के साथ बेटे जैस के साथ आवास-विकास में आकर किराए पर थे।
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पुलिस निकालेगी कॉल डिटेल, खंगाले सीसीटीवी
पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। पुलिस ने इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाले। संजय के घर से भी उसके कई मोबाइल बरामद किए गए। इन मोबाइल के अलावा संजय के लापता मोबाइल की डिटेल निकालने में भी पुलिस जुटी है। उसके बाद पुलिस उसके संपर्क वाले लोगों से पूछताछ करके घटना की कड़ियां जोड़ेगी।