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दो सचिवों ने किया छह लाख  का गबन, अब दर्ज होगी रिपोर्ट

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 बदायूं। जिले में एक के बाद एक घोटाले सामने आने लगे हैं। कुछ दिनों पहले तीन करोड़ रुपये की यूरिया का घोटाला प्रकाश में आया था। उसमें चल रही जांच अभी अंजाम तक नहीं पहुंची कि दो और मामले सामने आ गए। जमालपुर और पनौडी के सचिवों ने खाद की बिक्री करने के बाद किसानों से साढे छह लाख रुपये की वसूली की, लेकिन धनराशि को जमा करने की जगह खुद ही डकार गए। जांच के दौरान ये गड़बड़ी पकड़ में आई। इसमें जमालपुर के सचिव को 2016 में निलंबित कर दिया था, वहीं पनौडी सचिव के खिलाफ जांच चल रही थी, जो बाद में ठंडे बस्ते में डाल दी गई। इसकी एआर कोऑपरेटिव की ओर से दोबारा जांच कराई गई। इसमें दोषी मिलने पर उनकी ओर से एसएसपी को दोनों सचिवों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर दी है।   
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एआर कोऑपरेटिव के निर्देश पर ब्लॉक म्याऊ के गांव जमालपुर स्थित साधन सहकारी समिति पर दातागंज के एडीसीओ ने जांच की। समिति पर वर्ष 2014 में डीएपी 15,300 मीट्रिक टन, करीब तीन लाख 40 हजार रुपये और नीम एक्शन(यूरिया) 0.637 मीट्रिक टन का करीब 29 हजार 302 रुपये का स्टॉक उपलब्ध था। जब वर्ष 2015 में जांच की तो डीएपी 5.80 मीट्रिक टन मूल्य 1.29 लाख और रसायन मूल्य 0.29 लाख समिति में मिला। इस बीच में जो खाद गायब थी, उसकी रिपोर्ट समिति, बैंक शाखा अलापुर और मुख्यालय पर उपलब्ध नहीं थी। तत्कालीन सचिव द्वारा बिक्री की गई खाद और कृषि निवेश की वसूली गई धनराशि के मिलान में भी चार लाख 31 हजार 728 की धनराशि का अंतर मिला, जिसका रिकॉर्ड प्रभारी सचिव रवींद्र पाल के पास भी उपलब्ध नहीं था। बैंक, पीसीएफ और समिति के रिकॉर्ड खंगालने के बाद जांच अधिकारी को पता चला कि सचिव ओमप्रकाश द्वारा खाद बिक्री और कृषि निवेश ऋण वसूली में दो लाख 40 हजार 538 लाख रुपये का गबन किया गया।     इधर 2016 में साधन सहकारी समिति पनौडी की जांच की गई। वहां पर सचिव कृष्णपाल द्वारा खाद बेचने का मामला प्रकाश में आया। अपने को फंसता देखे आरोपी नौकरी छोड़कर भाग गया। इसके बाद में जांच ठंडे बस्ते में डाल दी गई। एआर कोऑपरेटिव की ओर अब इसकी दोबारा जांच कराई, तो पता चला अब तब सचिव द्वारा धनराशि जमा नहीं की गई। इस पर गुरुवार को एआर कोऑपेरिटव की ओर से दोनों मामलों में हुए करीब छह लाख रुपये के गबन की रिपोर्ट कराने को तहरीर दी है। ----------------              
दो साधन सहकारी समिति पर सचिवों की लापरवाही जांच में सामने आयी है। इन्हें धनराशि को जमा नहीं किया। इसलिए इसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जा रही है।                         
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-राघवेंद्र सिंह, एआर कोऑपरेटिव
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