बदायूं। सरकारी डॉक्टरों के नाम मुकदमे में शामिल करने के मामले में सीएमएस और एसीएमओ भी सिविल लाइंस एसओ के खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं। एसीएमओ हरपाल सिंह का कहना है कि कोर्ट के आदेश को दरकिनार कर सिविल लाइन एसओ ने हमारी फजीहत की है। वह अपने सम्मान से समझौता नहीं कर सकते। अब वह एसओ सिविल लाइन के खिलाफ कोर्ट में मानहानि का दावा करेंगे।
जिला अस्पताल के वर्तमान सीएमएस आरएस यादव, एसीएमओ डॉ. हरपाल सिंह और डॉ. एके पाराशर का नाम मुकदमे में शामिल करने के मामले में सिविल लाइन एसओ की मुश्किलें बए़ती जा रही हैं। एसपी सिटी के जांच शुरू कराने के बाद डॉक्टरों ने एसओ के खिलाफ कोर्ट में जाने का मन बना लिया है। कारोबारी सुभाष बतरा की ओर से 2013 में दायर की गई रिट के बाद हाइकोर्ट ने सरकारी डॉक्टरों का नाम मुकदमे में शामिल न करने का आदेश दिया था। डॉ. हरपाल सिंह इन दिनों बाराबंकी में सीएमएस है। फोन पर बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि मामला मेरे संज्ञान में है। इस मामले में हाईकोर्ट पहले ही अपना आदेश सुना चुका था कि राजपत्रित अधिकारियों को छोड़ आठ लोगों का नाम मुकदमे में शामिल किया जाए। इस मामले में डॉ. एके पाराशर और जिला अस्पताल के वर्तमान सीएमएस आरएस यादव से बातचीत की गई है।
सिविल लाइन के रहने वाले कारोबारी सुभाष बतरा ने वर्ष 2013 में कोतवाली के मोहल्ला चाहमीर निवासी व्यापारी वीरेंद्र धींगड़ा के बेटे सचिन पर हुए जानलेवा हमले के मामले में कोर्ट में एक रिट दायर की थी। इसमें कोर्ट ने सभी राजपत्रित अधिकारियों को छोड़ वीरेंद्र धींगड़ा, उनकी पत्नी सीमा धींगड़ा, बेटे दीपेश सहित आठ लोगो के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश सिविल लाइन पुलिस को दिए थे। मगर एसओ ने कोर्ट के आदेश को दरकिनार करते हुए 15 सितंबर को वर्तमान सीएमएस डॉ. आरएस यादव, एसीएमओ डॉ. हरपाल सिंह और डॉ. एके पाराशर का नाम भी मुक़दमे में शामिल कर दिया। एसपी सिटी के निर्देश पर इस मामले में सीओ सिटी वीरेंद्र सिंह यादव एसओ सिविल लाइन के खिलाफ जांच कर रहे है। सीओ सिटी के मुताबिक शुरुआती जांच में सीएमएस और दो एसीएमओ का नाम मुकदमे में शामिल करने के मामले में लापरवाही सामने आई है। इस मामले में एसओ से जवाब तलब किया गया है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।