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नारायण की करतूत से पिता शर्मसार, बोले- बेटे ने ही पहुंचा दिया जेल

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गुरुवार को अपहरण के ड्रामे का भंडाफोड हो जाने के बाद पुलिस ने झूठी रिपोर्ट लिखवाने के मामले में ‘अगवा’ नारायण राजपूत के पिता और भाई को भी दबोच लिया। पुलिस को हालांकि अब भी उसके बहनोई की तलाश है लेकिन पूछताछ के दौरान नारायण का पिता सेवानिवृत्त रेलकर्मी सुंदरलाल परेशान नजर आया। उसने इसके लिए बेटे की करतूत को जिम्मेदार ठहराया। इसे किस्मत का खेल बताते हुए यहां तक कह दिया कि बेटे की वजह से जेल जाना पड़ रहा है।
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कोतवाली क्षेत्र के गांव हरहरपुर से लापता नारायण राजपूत के लिए स्पेशल टीम के इंस्पेक्टर रामगोपाल शर्मा और कोतवाली में तैनात दरोगा रामऔतार ने गुरुवार तड़के हरियाणा के पानीपत की फैक्ट्री में काम करते समय दबोच लिया था। बड़े बेटे रनवीर के ससुराल वालों को फंसाने के लिए ड्रामेबाजी में पुलिस को अपहरण का मामला भी दर्ज करना पड़ा था लेकिन असलियत सामने आने में करीब 12 दिन लग गए। बरामद नारायण एक दिन पहले ही एसएसपी अशोक कुमार के सामने हकीकत बयां कर चुका है। वह तो घर से नाराज होकर चला गया था। एसएसपी के आदेश पर पुलिस ने नारायण, उसके पिता सुंदरलाल, भाई रनवीर, बहनोई हरीसिंह और दोस्त रवि के खिलाफ झूठी रिपोर्ट लिखाने और पुलिस को गुमराह करने की रिपोर्ट भी दर्ज कर ली। गुरुवार देर रात पुलिस ने सुंदरलाल ओर रनवीर को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान सुंदरलाल ने पुलिस को बताया कि उसका कोई दोष नहीं है। बेटा ऐसी करतूत कर बैठेगा, इसका अहसास तक नहीं हो पाया। कोर्ट में पेशी से पहले सुंदरलाल शर्मिंदा नजर आया लेकिन बड़े बेटे रनवीर के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी। इसके विपरीत दोस्त रवि की माने तो उसने तो नारायण के सेलफोन पर मैसेज दिया था कि जहां भी हो घर चले आओ। इसके बाद नारायण और रवि की बात वीडियो कॉल के जरिए जरूर हुई लेकिन नारायण ने यह कहकर फोन स्विच ऑफ कर लिया था कि हरियाणा के पानीपत में है।

पहले भी पानीपत में काम कर चुका है नारायण राजपूत
उझानी। शुक्रवार को जेल जाने से पहले नारायण राजपूत ने बताया कि पिता उसे खर्चे के लिए रुपये नहीं देते थे। वह हरियाणा में काम करने के लिए कोई पहली बार नहीं गया बल्कि पहले भी पानीपत की गत्ता फैक्ट्री में काम कर चुका है। घर से नाराज होकर जब वह पानीपत पहुंचा तो पूर्व परिचित कर्मचारी के माध्यम से फैक्ट्री में काम भी आसानी से मिल गया था। ब्यूरो
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हकीकत का पता घटना के तीसरे दिन लग गया था लेकिन रवि के पकड़ में नहीं आने से देर होती रही। पुलिस ने शिकंजा कसा तो रनवीर भी रिश्तेदारी में चला गया था। षड्यंत्रकारियों में शामिल हरीसिंह को भी जल्द दबोच लिया जाएगा। - विनोद कुमार, प्रभारी निरीक्षक
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