जाहरवीर महाराज का भंडारा कर गंगा स्नान को कछला घाट आए हाथरस जनपद के थाना हाथरस गेट के गांव सोखना निवासी 11 लोग गंगा स्नान करते समय डूब गए। गोताखोरों ने नौ लोगों को बचा लिया। जबकि एक किशोरी समेत तीन लोगों के शव मिले। परिवार वाले बिना पोस्टमार्टम के तीनों शव ले गए। घटना की खबर मिलने पर एसडीएम सदर प्रदीप यादव, सीओ उझानी वंशराज यादव मौके पर पहुंच गए।
हादसा पितृ पूर्णिमा पर सोमवार पूर्वाह्न रेलवे के पुराने पुल के पास हुआ। हाथरस के थाना हाथरस गेट के गांव सोखना निवासी कई परिवारों के महिला-पुरुष और बच्चे गंगा स्नान करते वक्त रेलवे के पुराने पुल के पिलर नंबर-छह के पास पहुंच गए। पिलर के आसपास गहराई अधिक थी। यहां नगर पंचायत ने संकेतांक भी लगवाए थे। स्नानार्थियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। गंगा स्नान करते वक्त सपना (18) पुत्री वीरेंद्र सिंह, ललिता (19) पुत्री राकेश, राहुल (22) पुत्र भूरी सिंह, पिंटू (18) पुत्र पूरन लाल, पिंटू का बड़ा भाई बंटी, लालजीत, हरीओम समेत 11 लोग डूबने लगे। इनको डूबता देख परिवार वालों ने शोर मचाया। पास ही मौजूद राजस्व कर्मी ओमबाबू ने आनन-फानन में गोताखोरों को बुलाया।
करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद गोताखोरों ने आठ लोगों को सुरक्षित निकाल लिया। रूबी, राहुल और सपना की मौत हो चुकी थी। परिवार वालों को उनके जीवित होने की उम्मीद थी। वह तीनों को उझानी सीएचसी लाए। यहां डॉक्टर निरंजन सिंह ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। अस्पताल में एसडीएम सदर प्रदीप यादव, सीओ वंशराज यादव भी सीएचसी पहुंच गए। उन्होंने मृतकों के परिवार वालों को सांत्वना दी। इधर, कोतवाल देवराज राठी ने बताया कि मृतकों के घरवालों के पोस्टमार्टम से इंकार के बाद पंचायतनामा की कार्रवाई पूरी करके शव उनके घरवालों को सौंप दिए गए हैं।
प्रशासन ने नो एंट्री जोन में फिर कर दी चूक!
मई में भी पिलर के पास गई थी नौ लोगों की जान
संकेतांक तो लगाए पर नहीं था पुलिस का पहरा
अमर उजाला ब्यूरो
उझानी (बदायूं)। कछला गंगाघाट पर सोमवार को हाथरस जिले के तीन स्नानार्थियों की मौत ने एक बार फिर से प्रशासन को व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं। मई में भी पूर्णिमा पर राजस्थान के धौलपुर के नौ स्नानार्थियों की गंगा में डूबने से मौत के बाद तमाम दावे किए गए। इस बार गहराई वाले स्थानों पर संकेतांक भी लगवाए गए, लेकिन पुलिस का पहरा नहीं था। यह सबसे बड़ी चूक रही।
कछला गंगाघाट का पूरा इलाका तीन पुल से जुड़ा है। रेलवे के नए और पुराने पुल के कुछ पिलर्स के पास गहराई अधिक होने की वजह से नगर पंचायत प्रशासन और कछला चौकी पुलिस सकेतांक लगा देती है। चूंकि इस बार गंगा में जल स्तर काफी कम है, सो स्थानीय प्रशासन को खतरा की आशंका नहीं थी। संकेतांकों पर गौर करना श्रद्धालुओं के जिम्मे ही छोड़ दिया गया। पिछली बार पिलर्स के आसपास संकेतांक के साथ पुलिस का पहरा भी था। इसी वजह से स्नान पर्व पर कोई हादसा भी नहीं हुआ था। दूसरे जिलों से आने वाले स्नानार्थियों को गंगा में गहराई वाले स्थानों का पता नहीं लग पाता। बाहरी श्रद्धालुओं को आगाह करने में प्रशासनिक स्तर से चूक भी उजागर होती रही है। इस बार भी चूक ने ही हाथरस जिले के तीन स्नानार्थियों की जान ले ली।
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मातम में बदला जाहरवीर के भंडारे का जश्न
पहुंचे प्रसाद बांटने, लौटे तो साथ थे अपनों के शव
उझानी। हाथरस के सोखना गांव में रविवार को जब अनुयाइयों ने जाहरवीर महाराज का भंडारा कराया, उसी वक्त तय कर लिया था कि अगले दिन कछला घाट पर सामूहिक रूप से गंगा स्नान करेंगे। कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। गंगा स्नान के बाद प्रसाद बांटने का जश्न तीन की मौत से मातम में बदल गया।
सोखरा के भूरी सिंह ने रविवार को अपने गांव में जाहरवीर महाराज के भंडारे में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। भूरी सिंह ही नहीं बल्कि सोखरा के अधिकतर ग्रामीण अपने परिवारों के साथ गंगा स्नान को पहुंचे थे। जवान बेटे राहुल की मौत से बदहवास भूरी सिंह ने बताया कि सभी लोगों ने तय किया था कि भंडारे में बचा प्रसाद गंगा स्नान के बाद घाट पर वितरित करेंगे। प्रसाद वितरण के बाद कन्याभोज कराने की नौबत आती उससे पहले ही नहाते वक्त एक-एक करके 11 लोगों के डूबने से कोहराम मच गया।
खुशियों का माहौल राहुल, रूबी और सपना की मौत से मातम में बदल गया। रूबी के पिता रामरतन ने बताया कि उनके साथ स्नानाथयों की संख्या 65 के आसपास थी। सभी लोग मेटाडोर समेत निजी वाहन से आए थे। भनक लगते ही सोखरा से उनके कई परिचित भी आ गए। शव साथ ले जाते वक्त उनकी आंखों से आंसुओं को सैलाब फूट पड़ा था।
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गोताखोरों ने कर दी बहुत देर
उझानी। मृतक सपना के पिता वीरेंद्र ने हादसे के बाद बचाव कार्य में देरी की दास्तां बयां की। बकौल, वीरेंद्र गोताखोरों को बुलाने के लिए वह काफी देर तक चीखता रहा। एक नाव से तीन-चार गोताखोर पहुंचे भी लेकिन वह हादसा स्थल की वजाय दूर इधर-उधर भटकाते रहे। गोताखोरों की वजह से सपना का शव खोजने में देर लगी।
कछला गंगाघाट पर नगर पंचायत प्रशासन और राजस्व कर्मियों की ओर से इंतजाम कराए गए थे। पिलर के पास गहराई की ओर कोई श्रद्धालु नहीं जाए, इसके लिए संकेतांक लगे थे, लेकिन ये लोग उसी ओर चले गए। पुलिस और राजस्व कर्मियों ने गोताखोरों की मदद से शव निलवाने में देर नहीं की।- प्रदीप यादव, एसडीएम सदर