बदायूं। सीएमओ डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय ने शुक्रवार को सीजेएम नवनीत भारती के कोर्ट में सरेंडर कर दिया। सरेंडर के बाद उनको न्यायिक हिरासत में ले लिया गया। बाद में सीएमओ के अधिवक्ता की ओर से कोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्र दिया गया। सुनवाई के बाद 25 हजार के निजी मुचलके और दो जमानती पेश करने के बाद कोर्ट ने सीएमओ को जमानत पर रिहा कर दिया।
शहर के मोहल्ला महाराजनगर की आरती यादव पुत्री गंगा सिंह ने पिछले वर्ष तत्कालीन सीएमओ डॉ. विक्रम सिंह पुंडीर की तैनाती के समय स्वास्थ्य विभाग में एएनएम पद के लिए आवेदन किया था। आरती ने आवेदन में तीन वर्ष पुराना पिछड़ी जाति का प्रमाण पत्र लगाया था। उनका आवेदन यह कहते हुए निरस्त कर दिया गया कि जाति प्रमाण पत्र पुराना है। आवेदक ने अनुभव प्रमाण पत्र भी दिया था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने आरती यादव को पिछड़ी जाति का न मानते हुए सामान्य जाति का माना। ऐसे में उनकी नियुक्ति नहीं हो सकी। इस पर आरती ने हाईकोर्ट की शरण ली। उन्होंने प्रमुख सचिव, डीजी हेल्थ, मिशन डायरेक्टर स्टेट हेल्थ सोसाइटी और सीएमओ बदायूं को आरोपी बनाया था। बाकी तीन आरोपियों की ओर से कोर्ट में अपना पक्ष दाखिल कर दिया गया, लेकिन सीएमओ की ओर से अपना पक्ष नहीं रखा गया। संबंधित पटल के कर्मचारियों ने मामले में सही ढंग से पैरवी नहीं की। कई नोटिस के बाद भी सीएमओ हाईकोर्ट में पेश नहीं हुए।
सीजेएम नवनीत भारती ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद में लंबित सिविल रिट पिटीशन आरती यादव बनाम स्टेट ऑफ यूपी के निर्देशानुसार सीएमओ बदायूं को गिरफ्तार कर कोर्ट में पांच सितंबर तक पेश करने के आदेश एसएसपी बदायूं को दिए थे। निर्देशों में कहा गया था कि उच्च न्यायालय इलाहाबाद में 31 अगस्त 2022 का आदेश सीजेएम कोर्ट में ईमेल द्वारा प्राप्त हुआ था। ईमेल में सीएमओ बदायूं पर वारंट का निष्पादन कराए जाने का आदेश दिया गया है। बृहस्पतिवार को सीएमओ ने सीजेएम कोर्ट में सरेंडर कर दिया। अब सीएमओ को नियत तिथि पर हाईकोर्ट में भी उपस्थित होना होगा।