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Budaun News: बेअसर है संचारी रोग अभियान

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- सिर्फ कागजों में अभियान चलाकर औपचारिकताएं पूरी
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- छह हजार मरीजों में से करीब दो हजार डायरिया के
संवाद न्यूज एजेंसी
बदायूं। जिले में संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान चला रहा है। इसके बाद भी गांवों में संक्रामक रोग तेजी से फैल रहे हैं। सबसे ज्यादा डायरिया के मरीज सामने आ रहे हैं। अब मच्छर जनित बीमारियां भी फैलने लगी हैं। इनके पीछे का कारण गांवों में फैली गंदगी और कीचड़ माना जा रहा है। कुछ गांवों में बच्चे खसरा की चपेट में आने लगे हैं।
जिले में गर्मी का मौसम शुरू होते ही संक्रामक रोग फैलने लगते हैं। इस साल संक्रामक रोगों से निपटने के दावे किए जा रहे थे। स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान भी शुरू किया। अभियान के तहत दावा किया जा रहा था कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर लोगों को संक्रामक रोगों से बचने के उपाय बताएंगी।
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पंचायती राज विभाग गांवों में फैली गंदगी को दूर करेगा, लेकिन विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान के दौरान ही गांवों में डायरिया फैल गया। मौजूदा समय में ऐसा कोई गांव नहीं है जहां पर 20 से 30 मरीज डायरिया की चपेट में न आ रहे हों। डायरिया के बढ़ते मरीजों की संख्या को देखते हुए विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान पर भी सवालिया निशान लगने लगे हैं।

सीएचसी-पीएचसी से लेकर जिला अस्पताल में भी बढ़ी मरीजों की संख्या
- पिछले पांच दिन में जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ी है। अब तक मौसम परिवर्तन के साथ जहां खांसी, जुकाम, बुखार के मरीज ज्यादा निकल रहे थे, वहीं तापमान में बढ़ोतरी होते ही डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ी है। जिला अस्पताल, राजकीय मेडिकल कॉलेज और जिले के सभी 16 स्वास्थ्य केंद्रों पर रोजाना करीब छह हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, पिछले चार-पांच दिन में इनमें 30 से 40 प्रतिशत मरीज डायरिया के आ रहे हैं।
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संक्रामक रोग फैलने का फायदा उठा रहे झोलाछाप
- जिले में संक्रामक रोग फैलने का फायदा सीधे तौर पर झोलाछाप उठा रहे हैं। उल्टी, दस्त की शिकायत होते ही मरीज सरकारी अस्पतालों से पहले झोलाछापों के यहां पहुंचते हैं। झोलाछाप इलाज के नाम पर मोटी कमाई कर रहे हैं। कई मरीजों को उनके इलाज से आराम न मिलने पर वह सरकारी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। इन झोलाछापों की शिकायतें स्वास्थ्य विभाग तक पहुंच रही हैं, लेकिन अभी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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जनवरी से मार्च तक मलेरिया के निकले 21 केस
- जिले में मच्छर जनित बीमारियों के मरीज भी बढ़ने लगे हैं। हालांकि अभी डेंगू के मरीज सामने नहीं आए हैं, लेकिन जनवरी से मार्च तक मलेरिया के 21 केस निकले हैं। इससे मलेरिया विभाग भी चिंतित है। वजह है कि अभी गर्मी और बढ़ने के साथ ही मच्छरों की संख्या भी बढ़ेगी ऐसे में मच्छर जनित बीमारियां और फैलने का अंदेशा जताया जा रहा है।
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गांवों में पानी की नहीं हो रही जांच, दूषित पानी पी रहे लोग
- पिछले साल वजीरगंज ब्लॉक में दूषित पानी से संक्रामक रोग फैलने के कई मामले सामने आए थे। ऐसे में जिन गांवों में ज्यादा केस मिले थे वहां हैंघडपंपों के पानी की गुणवत्ता की जांच कराई गई थी। इसमें पुष्टि हुई थी कि हैंडपंपों से दूषित पानी आ रहा है, इसके सेवन से लोग डायरिया के शिकार हो रहे हैं। पंचायती राज विभाग हो या फिर जल निगम, कोई भी अब गांवों में पानी की गुणवत्ता की जांच नहीं करा रहा है, इस वजह से लोग दूषित पानी का ही सेवन कर रहे हैं। दूषित पानी भी संक्रामक रोग फैलने की एक वजह है।
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वर्जन ...
- संक्रामक रोगों से निपटने को विशेष टीमों का गठन किया गया है। गांव-गांव जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। घरों के आसपास गंदा पानी जमा होने पर उसमें पनपने वाले मच्छरों के लार्वा को किस तरह से नष्ट किया जाए इसके बारे में भी सभी को बताया जा रहा है। किसी गांव में अगर डायरिया के मरीज निकलने की शिकायत आती है तो तुरंत डॉक्टरों की टीम वहां भेजी जा रही है। - डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ
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