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Budaun News: ओपीडी से गायब डॉक्टरों पर सीएमएस ने नहीं की कार्रवाई

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पहले दवा लेने को आपस में ​भिड़े मरीज, बचाते लोग। संवाद
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बदायूं। महिला अस्पताल की ओपीडी से लगातार दो डॉक्टर नदारद रह रहे हैं। मामला सामने आने पर सीएमएस ने जांच कर कार्रवाई करने के लिए कहा था, लेकिन डॉक्टरों से कारण तक नहीं पूछा गया। इसी ढिलाई का फायदा उठाते हुए डॉक्टर अक्सर गायब रहते हैं। बृहस्पतिवार को सीएमएस और एक अन्य चिकित्सक ने मरीजों की दवा दी।
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महिला अस्पताल में चार डॉक्टर ओपीडी करते हैं। 25 जून को लापरवाही यह रही कि दो डॉक्टरों को एक साथ अवकाश दे दिया गया था और एक डॉक्टर काम से गई थीं। एक घर से ही नहीं निकलीं। इस तरह ओपीडी से सभी डॉक्टर नदारद हो गए थे। मरीजों को इंतजार करना पड़ा था। मरीजों के हंगामे के बाद सीएमएस डॉ. इंदुकांत वर्मा मौके पर पहुंचे और खुद बच्चों को दवा देने लगे। एक डॉक्टर को फोन कर बुलाया गया। इस मामले में सीएमएस ने कार्रवाई करने की बात कही थी, लेकिन दस दिन बाद कार्रवाई तो दूर किसी से जवाब तक नहीं मांगा गया।


देर से पहुंचे डॉक्टर, दवा लेने के लिए मरीजों में धक्का-मुक्की

बृहस्पतिवार को भी लापरवाही दिखी। सुबह 10.30 बजे तक महिला अस्पताल की ओपीडी खाली पड़ी रही। 11 बजे डॉक्टर ओपीडी में पहुंचे तो मरीजों की लंबी लाइन लगी थी। पहले दवा लेने के लिए मरीज आपस में भिड़ गए। कतार में बैठे मरीजों में धक्का-मुक्की होने लगी। दो महिलाओं में मारपीट तक की नौबत आ गई। डॉक्टर ने कमरे से निकलकर मरीजाें को समझाया कि सभी को दवा मिलेगी, कोई परेशान न हो। कतार में शांति से बैठ जाओ। इसके बाद मरीज कतार में दो घंटे तक बैठे तब कहीं जाकर दवा मिल सकी।
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कार्रवाई में ढिलाई डॉक्टरों में बढ़ा रही लापरवाही
अधिकांश डॉक्टर संविदा पर तैनात हैं। एक तो उनको नौकरी जाने का कोई डर नहीं होता क्योंकि वह खुद के अस्पताल भी संचालित कर रहे हैं। अधिकारी भी उन पर कोई कार्रवाई नहीं करते, इससे देरी से आना, नदारद रहना डॉक्टरों की आम बात हो गई है। खामियाजा दवा लेने आने वाली महिलाओं और बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।

डॉक्टरों को कई बार मौखिक समझाया गया है। देरी से न आने की हिदायत भी दी जा चुकी है। बावजूद इसके डॉक्टर सुधर नहीं रहे। डॉक्टर संख्या में पूरे होने के बाद लापरवाही करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल समय से आने की हिदायत दी गई है। -डॉ. इंदुकांत वर्मा, सीएमएस, महिला अस्पताल

पहले दवा लेने को आपस में भिड़े मरीज, बचाते लोग। संवाद

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