बदायूं। बिसौली कस्बे में बिना एनओसी के चल रहे माहेश्वरी हॉस्पिटल का संचालन बंद कराने के लिए कोई अधिकारी जमीन पर उतरने को तैयार नहीं है। स्वास्थ्य विभाग से लेकर पुलिस प्रशासन सब एक-दूसरे पर मामला टालकर जिम्मेदारी से बच रहे हैं। अस्पताल बंद कराने के लिए 14 जून को सीएमओ की ओर से एक पत्र पुलिस को भेजा गया था। इस पर इंस्पेक्टर सुनील अहलावत का साफ कहना है कि यह हमारा काम नहीं है। सीएमओ खुद आएं और अस्पताल का संचालन बंद कराएं।
इस अस्पताल को बंद कराने के लिए करीब एक माह पहले मुख्य अग्निशमन अधिकारी रामराजा यादव ने सीएमओ को पत्र भेजा था। उन्होंने लिखा था कि माहेश्वरी अस्पताल बिना एनओसी के चल रहा है। कई जिलों में अस्पतालों में आगजनी की घटनाएं हो चुकी हैं और उनमें कई लोगों की मौत भी हो चुकी है। ऐसे में जब तक हॉस्पिटल की व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हो जाती हैं तब तक इसका संचालन बंद कराया जाए। इस पर सीएमओ ने भी मामले की जांच कराई और 31 मई को अस्पताल बंद कराने के लिए संचालकों को पत्र भेजा।
इसके बाद भी अस्पताल बंद न होने पर पुलिस को पत्र लिखा गया। कोतवाली पुलिस ने अस्पताल को तो बंद नहीं कराया लेकिन इंस्पेक्टर सुनील अहलावत ने यह जरूर कहा कि उन्होंने भी अस्पताल को नोटिस दे दिया है। अस्पताल बंद कराना उनका काम नहीं है। सीएमओ खुद आकर यहां देखें कि क्या कमी है। उसके बाद खुद ही इसे बंद कराएं।
जारी नहीं हुई एनओसी
अस्पताल के डॉ. मनोज माहेश्वरी ने बताया कि अग्निशमन की ओर से एनओसी ही जारी नहीं की गई। अस्पताल की चार मंजिल बिल्डिंग है। कुछ कमियां रह गईं हैं। उस पर काम चल रहा है। हम सीएमओ से मिले थे। उनसे कहा है कि जल्द ही कमियों को पूरा करा लेंगे। उसके बाद एनओसी भी जारी हो जाएगी।
सीएमओ की ओर से एक पत्र आया है। अस्पताल में क्या कमियां हैं, यह सीएमओ ही बता सकते हैं। अस्पताल को बंद कराना मेरा काम नहीं है। सीएमओ खुद आएं और संचालन बंद कराएं। - सुनील अहलावत, इंस्पेक्टर बिसौली
मैंने बगैर एनओसी के संचालित अस्पताल बंद करने के लिए पत्र लिखा था लेकिन जब बुधवार को अस्पताल की ओर से लोग आए तो स्थिति साफ हुई। एनओसी प्रक्रिया में है। दमकल सुरक्षा संबंधी 90 फीसदी काम मौके पर हो गया है। साक्ष्य अस्पताल की ओर से दिए गए हैं। एनओसी के लिए प्रोवीजनल रजिस्ट्रेशन है। इसमें औपचारिकताएं अगस्त तक पूरी करने का समय है। -डॉ. अब्दुल सलाम, सीएमओ