बदायूं। सालारपुर ब्लॉक के गांव यूसुफ नगर में 12 वीं के छात्र पवन सोलंकी की मौत ल्यूूकेमिया के कारण हुई थी। रविवार को सीएमओ डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय यूसुफ नगर पहुंचे। उन्होंने छात्र के परिवार से मुलाकात की, छात्र के इलाज से संबंधी जांच रिपोर्ट और डॉक्टरों के परामर्श को देखा। जांच में पाया गया कि पवन सोलंकी ल्यूकेमिया से पीड़ित था। यह एक प्रकार की ब्लड कैंसर से संबंधी बीमारी है। इसी कारण छात्र की जान चली गई।
रविवार को स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में सालारपुर ब्लॉक के यूसुफ नगर समेत दातागंज, जगत, समरेर ब्लॉक के पांच गांवों में हेल्थ कैंप लगाए गए। कैंपों में 288 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इनमें 98 लोग बुखार से पीड़ित निकले। 32 लोगों की स्लाइड बनाकर मलेरिया की जांच की गई तो समरेर ब्लॉक के गांव कादराबाद में तीन मलेरिया के रोगी मिले। सालारपुर के यूसुफ नगर, कान्हा नगला, दातांज के अगोरी, जगत के छोटा परसुरा और समरेर के कादराबाद में हेल्थ कैंपों का आयोजन किया गया। इन गांवों में बड़ी संख्या में बुखार पीड़ित मिले हैं। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद रोगियों को दवाओं का वितरण करने के साथ ही गांवों में मलेरिया विभाग की ओर से मच्छर और लार्वा नाशक दवाओं का छिड़काव कराया गया।
रविवार को स्वास्थ्य विभाग का विशेष फोकस यूसुफ नगर पर रहा। दरअसल, यहां शनिवार को रामभान सोलंकी का 16 वर्षीय बेटा पवन सोलंकी की बरेली के एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। पवन कुंवरगांव के सेठ छदम्मीलाल इंटर कॉलेज में 12 वीं का छात्र था। बृहस्पतिवार को पवन को तेज बुखार आया था। परिवार वालों ने निजी डॉक्टर से इलाज कराया। फायदा न होने पर पवन को शुक्रवार को बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। शनिवार को इलाज के दौरान पवन की मौत हो गई थी। जांच में सामने आया है कि पवन की मौत संक्रामक बीमारी से नहीं बल्कि ल्यूकेमिया नाम की बीमारी से हुई है।
यूसुफ नगर समेत कई गांवों में विशेष सफाई अभियान आज
कुंवरगांव। सालारपुर ब्लॉक के गांवों में हर वर्ष संक्रामक और मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप रहता है। पिछले वर्ष जिले में डेंगू के रिकार्ड 417 रोगी मिले थे। इनमें सबसे ज्यादा रोगी सालारपुर ब्लॉक के गांव शेरगंज के थे। यहां 12 लोगों की संक्रामक बीमारियों से मौत भी हुई थी। इस वर्ष भी सालारपुर ब्लॉक के गांवों में बुखार का प्रकोप है। दरअसल, ज्यादातर गांवों में सफाई कर्मचारियों के न पहुंचने के कारण गंदगी का अंबार है। ऐसे में स्वास्थ्य और मलेरिया विभाग की ओर से पंचायती राज विभाग को गांवों मेें सफाई कराने को लिखा गया है। सोमवार को गांवों में विशेष अभियान चलाकर सफाई कराई जाएगी।
छात्र की मौत किसी संक्रामक बीमारी से नहीं बल्कि ल्यूकेमिया के कारण हुई थी। यह एक प्रकार का ब्लड कैंसर है। छात्र के घर पहुंचकर परिवारवालों से बात करने के साथ छात्र की स्वास्थ्य जांच रिपोर्ट और दवाओं के संबंध में जानकारियां जुटाने पर यह बात सामने आई है। गांव में कुछ बुखार के रोगी है, लेकिन जिले में अभी संक्रामक बीमारियों जैसी कोई बात नहीं है।-डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, सीएमओ