शाहजहांपुर। निराश्रित पशुओं को संरक्षित करने के लिए चलाए गए अभियान की समय सीमा बीतने के बाद इसकी हकीकत परखने शासन से नामित नोडल अधिकारी गन्ना विकास विभाग के विशेष सचिव शिव सहाय बुधवार रात तक यहां आएंगे। प्रशासन का दावा है कि सारे छुट्टा पशु पकड़े जा चुके हैं लेकिन शहर से लेकर देहात तक सड़कों पर छुट्टा घूमते पशुओं के झुंड अफसरों के दावे को नकार रहे हैं।
छुट्टा पशुओं को पकड़ने के तीन माह तक 31 मार्च तक विशेष अभियान चला लेकिन इससे हालात पर कोई खास असर नहीं पड़ा। मुख्यमंत्री के निर्देश पर विशेष सचिव शिव सहाय को जिले का नोडल अधिकारी नामित किया गया है। बरेली से दोपहर बाद विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. चौधरी यहां पहुंचे। इससे पहले, अभियान के नोडल अधिकारी सीवीओ डॉ. जयप्रकाश ने सभी निकायों और ब्लॉक कार्यालयों से संरक्षित पशुओं का ब्योरा जुटाया और वही आंकड़े संयुक्त निदेशक को प्रस्तुत किए।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में कराई गई पशुगणना में जनपद में निराश्रित पाए गए 9862 पशु पकड़ने का लक्ष्य मिला, लेकिन प्रजनन से इन पशुओं की संख्या बढ़कर 13000 से अधिक हो चुकी है। उन्होंने बताया कि इन पशुओं को जनपद में चार वृहद गौशालाओं, दो नंदी शालाओं और 70 पशु आश्रय स्थलों में रखा गया है, जबकि शेष पशुओं को पशुपालकों की सुपुर्दगी में दिया जा रहा है। सीवीओ ने बताया कि शेष छुट्टा पशु पकड़ने के लिए सभी ईओ और खंड विकास अधिकारियों से निरंतर पत्राचार हो रहा है।
निर्माणाधीन गौ संरक्षण केंद्रों का जेडी ने किया निरीक्षण
नोडल अधिकारी के जनपद आगमन से पहले संयुक्त निदेशक डॉ. चौधरी ने भावलखेड़ा ब्लॉक के गांव सल्लिया और दाउदपुर में निर्माणाधीन वृहद गौ संरक्षण केंद्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने शेष बचे निराश्रित पशु संरक्षित करने के लिए निर्माण कार्य जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए। संयुक्त निदेशक को सीवीओ ने यह भी बताया कि ददरौल ब्लॉक के घुसगवां व शहबाजनगर गांव में भी नए वृहद गौ संरक्षण केंद्र जल्द बनने पर उनमें करीब दो हजार निराश्रित पशु रखे जा सकेंगे।
निराश्रित पशु और उनके संरक्षण के संसाधन
निराश्रित पशुओं के संरक्षण का लक्ष्य 9862
जनपद में विभिन्न स्थानों पर संरक्षित पशु -13003
55 ग्रामीण अस्थायी आश्रय स्थलों में संरक्षित पशु3126
नौ शहरी अस्थायी आश्रय स्थलों में संरक्षित पशु971
दो कान्हा गौशालाओं में संरक्षित पशु-510
70 गौ आश्रय स्थलों में संरक्षित पशु-7090
पशुपालकों की सुपुर्दगी में संरक्षित किए गए पशु-5913
जनवरी से अब तक पकड़े गए निराश्रित पशु2172
अल्हागंज में हाईवे पर छुट्टा घूम रहे पशु
अल्हागंज। नगर व ग्रामीण क्षेत्रों में छुट्टा गोवंश से किसान परेशान हैं तो कस्बे की सड़कों-गलियों में घूमते पशुओं से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। घरों के बाहर कोई भी अपने बच्चों को खेलने नहीं देता क्योंकि उन्हें पशुओं से बच्चों को कुचलने का डर है। मोहल्ला पीरगंज, आजाद नगर और गांव चिलौआ में तीन गौशालाओं की क्षमता सिर्फ 500 पशु रखने की है। इसके विपरीत सैकड़ों छुट्टा पशु घूम रहे हैं। गांव गोरा, मनिहार, साहबगंज आदि के पास बंजर भूमि पर इनके झुंड देखे जा सकते हैं। संवाद
निराश्रित पशुओं के प्रबंधन, भरण-पोषण और गौशालाओं के संचालन का उत्तरदायित्व नगरीय निकायों और ग्रामीण क्षेत्र में प्रधानों से लेकर खंड विकास अधिकारियों को दिया गया है। संबंधित अधिकारी जन सहभागिता से काम करेें, तभी छुट्टा पशुओं से छुटकारा मिल सकेगा। इन तथ्यों सहित इस दिशा में विभाग स्तर से किए गए प्रयासों से नोडल अधिकारी को भी अवगत कराया जाएगा।
- डॉ. जयप्रकाश सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी