सैदपुर/बदायूं। नगर पंचायत की भ्रष्ट कार्यप्रणाली के चलते घटिया गुणवत्ता की वजह से स्ट्रीट लाइट के 110 खंभे सड़क किनारे लगने के मात्र एक माह बाद ही गिर गए। कुछ खंभे लगवा दिए गए लेकिन करीब दो दर्जन खंभे आज भी जस के तस रोड किनारे पड़े हैं। करीब साढ़े आठ लाख की लागत से लगी यह लाइटें अब सड़कों की धूल फांक रही हैं।
नगर पंचायत को सौंदर्यीकरण के तहत स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए शासन से साढ़े आठ लाख की धनराशि उपलब्ध कराई गई थी। नगर पंचायत प्रशासन द्वारा तस्लीम कव्वल के शादीघर से लेकर सैयद डिग्री कॉलेज तक मुरादाबाद- फर्रुखाबाद हाईवे मार्ग के किनारे 65 खंभे और सैदपुर-करेंगी मार्ग पर 45 खंभे अगस्त में लगाए गए।
करीब चार महीने पहले आई आंधी के कारण हाईवे किनारे लगे करीब आधे खंभे गिर गए। गनीमत यह रही कि इससे कोई हादसा नहीं हुआ, क्योंकि हाईवे होने की वजह से इस मार्ग पर वाहनों का आवागमन काफी अधिक रहता है।
इसके अलावा सैदपुर-करेंगी मार्ग पर भी दो दर्जन खंभे इस आंधी में गिर गए। हाईवे किनारे वाले करीब दो दर्जन खंभों को तो नगर पंचायत ने दोबारा लगवा दिया लेकिन चार महीने बीतने के बावजूद यहां लगे अन्य खंभे और सैदपुर-करेंगी रोड के खंभों को लगाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। नतीजतन ये खंभे सड़क किनारे पड़े धूल फांक रहे हैं।
इस बारे में नगर पंचायत के पूर्व सभासद एहतराम उद्दीन, सतीश मौर्य, तफज्जुल हसन आदि का आरोप है कि खंभों की गुणवत्ता काफी खराब है, साथ ही एस्टीमेट के हिसाब से फाउंडेशन और टेंप्लेट बोर्ड बगैरा भी उचित ढंग से नहीं लगाए गए। घटिया सामग्री होने के कारण ही एक महीने भी खंभे नहीं टिक सके।
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सड़क किनारे पड़े गलने लगे खंभे
नगर पंचायत प्रशासन की उदासीनता का आलम यह है कि खंभे गिरने के बाद उसने उन्हें लगवाना तो दूर, उठवाना तक मुनासिब नहीं समझा। ऐसे में लाखों रुपये की लागत से आए खंभे अब सड़क किनारे पड़े-पड़े गलने लगे हैं। इसके साथ ही पथ प्रकाश व्यवस्था भी चौपट पड़ी है। जब इस संबंध में ईओ सतपाल सिंह से पूछा गया तो उन्होंने दो टूक कह दिया कि मामला संज्ञान में है। यदि खंभों का कार्य ठेकेदार ने उचित ढंग से नहीं किया है तो अब वह ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। उसको भुगतान हो चुका है।
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शिकायत का भी नहीं हुआ असर
सरकार ने जिस उद्देश्य से साढ़े आठ लाख रुपये की राशि नगर के सौंदर्यीकरण और पथप्रकाश व्यवस्था को उपलब्ध कराई थी, वह उद्देश्यहीन साबित हुई। तत्कालीन नगर पंचायत सभासदों द्वारा उस समय डीएम को पत्र प्रेषित करके की गईं भ्रष्टाचार की शिकायत का भी कोई असर नहीं हुआ। एक बार फिर पूर्व सभासदों द्वारा इसकी शिकायत डीएम से की गई है।