उझानी (बदायूं)। किसानों को कृषि उत्पादन मंडी समिति तक आने-जाने की सुविधा मुहैया कराने के लिए 1.25 करोड़ की लागत से बना मिनी बाईपास कई जगहों पर उधड़ गया है। गड्ढों की वजह से यहां का हर मोड़ खतरनाक हो गया है।
पीडब्ल्यूडी ने करीब पांच साल पहले उझानी-कादरचौक रोड से अढ़ौली रेल फाटक के पास से मिनी बाईपास का निर्माण कराया था। इसके लिए कुछ लोगों ने अपनी भूमि भी मुहैया कराई थी। कस्तूरबा आवासीय विद्यालय के सामने से होकर मिनी बाईपास भूड़ा-भदरौल रोड से जुड़ा था। इसके पीछे पीडब्ल्यूडी की मंशा थी किसानों के अनाज लदे वाहनों का दबाव मुख्य बाजार की सड़क पर कम हो जाए।
ऐसा हुआ भी, बाईपास बनने का कादरचौक क्षेत्र के साथ ही उझानी ब्लॉक क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों को लाभ मिला। निर्माण पर करीब 1.25 करोड़ रुपये खर्च हुए। लेकिन अब मिनी बाईपास की सबसे ज्यादा दुर्दशा कस्तूरबा विद्यालय मोड़ और गांव मीहलालनगला के पास है।
इसके अलावा भी कोई ऐसा मोड़ नहीं है, जहां सड़क जर्जर न हो। बताते हैं कि सड़क की गुणवत्ता पर निर्माण के दौरान भी सवाल उठे थे लेकिन उस वक्त पीडब्ल्यूडी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। इसी का नतीजा है कि किसानों को अब अनाज लदे वाहन लेकर पंखा रोड के रास्ते मेन मार्केट से होकर निकलना पड़ता है।
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मालगोदाम पर मालगाड़ियों में लोडिंग और अनलोडिंग ने बढ़ाई दिक्कत
रेलवे स्टेशन स्थित मालगोदाम पर जिस समय मालगाड़ियों में अनाज की लोडिंग और अनलोडिंग का काम चल रहा होता है, तब अढौली फाटक के पास सैकड़ों की संख्या में ट्रकों की आवाजाही होती है। ऐसे में कादरचौक की तरफ आने-जाने वाले भारी वाहनों के लिए गोशाला होकर मिनी बाईपास ही इकलौता रास्ता बचता है। ट्रक और ट्रैक्टर चालक मिनी बाईपास खस्ताहाल होने की वजह से उधर से आना-जाना सुविधाजनक नहीं समझते। उन्हें चिंता हादसा होने की भी लगी रहती है।
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उझानी मिनी बाईपास की सड़क जर्जर होने की मुझे जानकारी नहीं है पिछले महीने कुछ सड़कों की मरम्मत कराने के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। सड़क अगर खस्ताहाल है तो वह प्रस्ताव में जरूर शामिल होगी। फिर भी पीडब्ल्यूडी कर्मियों को मौके पर भेजकर हकीकत का पता कराया जाएगा।
- मनीष सिंह, अधिशासी अभियंता