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मृतक बंदी के आश्रितों को मिलेगा मुआवजा, दोषी जेल कर्मियों से होगी वसूली

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बदायूं। जिला जेल में विचाराधीन बंदी की मौत के मामले में मानवाधिकार आयोग ने मृतक बंदी के आश्रितों को तीन लाख रुपये का मुआवजा देने की संस्तुति की है। इसके बाद शासन के विशेष सचिव की ओर से इस संबंध में कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग को निर्देशित किया गया है। मुआवजे के बराबर की धनराशि जेल प्रशासन के दोषी पाए गए कर्मियों से वसूलकर राजकोष में जमा की जाएगी।
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संभल जिले के थाना रजपुरा के गांव सिंधौली निवासी शिवेंद्र पुत्र करन सिंह जिला जेल में हत्या के मामले में विचाराधीन बंदी था। 16 अक्तूबर 2016 को शिवेंद्र की जिला जेल में मौत हो गई थी। परिवार वालों ने उस समय गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि, जेल प्रशासन इन आरोपों से इन्कार करता रहा। बाद में परिवार वालों ने मानवाधिकार आयोग में गुहार लगाई थी। मानवाधिकार आयोग ने पूरे प्रकरण को सुनने के बाद प्रदेश सरकार को मृतक बंदी के आश्रितों को तीन लाख रुपये मुआवजा देने की संस्तुति की है। आयोग के निर्देश के बाद शासन के विशेष सचिव सुरेश कुमार पांडेय ने कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग को इस संबंध में निर्देशित किया है।
विशेष सचिव की ओर से कहा गया है कि वित्तीय वर्ष 2022-23 में मुआवजा इस शर्त के अधीन प्रदान किया जाए कि मुआवजा के समतुल्य धनराशि कारागार प्रशासन के दोषी पाए गए कर्मियों से वसूलकर राजकोष में जमा करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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संबंधित बंदी की मौत 2016 में हुई थी। इस संबंध में शासन से मिले मुआवजा संबंधी आदेशों का पालन किया जाएगा। बजट के लिए पत्राचार किया गया है। बजट मिलने पर जल्द मुआवजे का भुगतान कर दिया जाएगा। बाद में संबंधित कारगार कर्मियों से वसूूली की प्रक्रिया की जाएगी।
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- रणंजय सिंह, जेलर
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