उझानी (बदायूं)। नमामि गंगे अभियान के तहत गंगा और उसके घाटों की सफाई को लेकर केंद्र सरकार की योजना को पलीता कोई और नहीं, बल्कि व्यवस्था से जुड़े मुलाजिम ही लगा रहे हैं। इसका एक नमूना बुधवार सुबह सोशल साइट के प्लेटफार्म पर सामने आया, जब कूड़ा डालने वाले नगर पंचायत के वाहन ने हकीकत सबके सामने ला दी। दोपहर बाद यह मामला अफसरों के संज्ञान में भी पहुंच गया।
यहां बता दें कि गंगा के जलस्तर में वृद्धि के बाद निर्माणाधीन शवदाह गृह के पास अस्थायी अंत्येष्टि स्थल बना लिया गया है। इधर, गंगा से चंद कदम दूर पिछले कुछ दिनों से नगर पंचायत के कर्मचारियों ने कूड़े के ढेर भी लगाने शुरू कर दिए। कूड़े के ढेरों को देख कतई नहीं लगता कि गंदगी महज गंगाघाट की होगी। इलाके के लोग बताते हैं कि कस्बे के कूड़े को भी कर्मचारी अंत्येष्टि स्थल के पास वाहनों से फेंक जाते हैं।
यहां बता दें कछला का डंपिंग ग्राउंड बरेली-मथुरा हाईवे से कुछ दूरी पर वितरोई मोड़ के पास है बावजूद इसके कूड़े के ढेर गंगा किनारे लगा दिए गए हैं। सोशल मीडिया पर आने के बाद मामला अफसरों के संज्ञान में पहुंचा तो ईओ रतन कुमार पांडेय ने तुरंत सफाई कराने के निर्देश दिए।
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कांवड़ियों का भी नहीं आया ख्याल
कूड़ा डालते समय कांवड़ियों की मौजूदगी का भी नगर पंचायत कर्मियों को ख्याल नहीं आया। यह भी ध्यान नहीं आया कि अंतिम सोमवार से दो-तीन पहले घाट पर कांवड़ियों की भीड़ उमड़ेगी।
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भाजपा नेता ने एसडीएम, विधायक से की शिकायत
भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के जिला संयोजक किशनचंद्र शर्मा ने घाट की तस्वीरों के जरिये हकीकत एसडीएम सदर एसपी वर्मा, भाजपा विधायक हरीश शाक्य के अलावा पार्टी जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता के संज्ञान में ला दी है। किशनचंद्र शर्मा गंगा आरती समिति से भी जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि गंगाघाट पर ऐसा पहले कभी नहीं होता था।
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अंत्येष्टि स्थल स्थायी नहीं है। कूड़ा कस्बे का नहीं, बल्कि घाट की सफाई के दौरान निकला है। मामला सामने आते ही कूड़े के ढेर हटवाने के लिए कार्रवाई शुरू करा दी गई है। सफाई कर्मियों से कहा गया है कि कूड़ा लदे वाहन निर्धारित डंपिंग ग्राउंड पर अनलोड किए जाएं।
- रतन कुमार पांडेय, ईओ, कछला