ये होता है चकोरी का इस्तेमाल
कृषि वैज्ञानिक संजय कुमार ने बताया कि इसका उपयोग हरे चारे के अलावा औषधीय रूप में कैंसर जैसी बीमारी में भी किया जाता है। आमतौर पर कॉफी के विकल्प के रूप में इसका प्रयोग किया जाता है, लेकिन इसमें कैफीन नहीं होता है और इसका स्वाद चॉकलेट की तरह होता है। यदि इसे कॉफी के साथ प्रयोग किया जाए तो यह कैफीन के प्रभावों को भी रोकता है।
एक बीघा में लगता है सिर्फ 100 ग्राम बीज
चकोरी फसल की बुआई अक्तूबर-नवंबर में होती है। एक बीघा चकोरी के लिए 100 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है। इसकी पैदावार 35 से 50 क्विंटल बीघा तक हो जाती है। बुआई के समय इसमें केवल डीएपी का प्रयोग होता है, यूरिया नहीं लगाई जाती है। इसमें नराई की जाती है, साथ ही पूरी फसल के दौरान चार से पांच बार पानी लगाना होता है। किसानों ने बताया कि इसके पत्तों को हरे चारे के रूप में भी प्रयोग करते हैं, इससे दुधारू पशुओं में दूध की मात्रा बढ़ती है।