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Budaun News: बसपा ने पूर्व विधायक मुस्लिम खां को बनाया उम्मीदवार, सपा के गड़बड़ाएंगे समीकरण

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मु​स्लिम खां के प्रत्याशी बनाए जाने की सूचना पर मंडल व जिले के पदा​धिकारियों ने ककराला ​स्थित उ
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बदायूं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने भी अपने पत्ते खोल दिए हैं। ककराला निवासी बसपा के पूर्व विधायक मुस्लिम खां को उम्मीदवार बनाए जाने पर सहमति बन गई है। अधिकृत तौर पर 15 अप्रैल को घोषणा होगी। नामांकन 16 अप्रैल को कराया जाएगा।
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मुस्लिम खां 29 साल से सियासत में हैं। शुरुआती दिनों में क्षेत्रीय नेता और राज्यमंत्री रहे बनवारी सिंह यादव के करीबियों में उनकी गिनती होती थी, लेकिन बाद में उन्होंने बसपा से जुड़कर जिले की राजनीति में अपना वजूद कायम किया। उनके प्रत्याशी बनने की खबर लगते ही समर्थकों का उनके आवास पर तांता लग गया है। मुस्लिम खां के बसपा के टिकट पर चुनाव मैदान में आने से जहां भाजपा अपनी एकतरफ़ा जीत का दावा कर रही है, वहीं सपा को मुस्लिम मतों के विभाजन का खतरा सताने लगा है।
मुस्लिम वोट अगर बसपा की ओर खिसका तो इसका सपा को खासा नुकसान हो सकता है। बदले राजनीतिक समीकरण भाजपा के लिए मुफीद साबित हो सकते हैं। एक तरफ मुस्लिम समाज के कद्दावर नेताओं की बयानबाजी से मुस्लिम समाज में सपा के प्रति रुझान कम हुआ है, वहीं सपा से प्रत्याशी को लेकर भी मुस्लिम समाज उत्साहित नहीं है। मुस्लिमों का बड़ा वर्ग धर्मेंद्र यादव को अपना नेता मानता रहा है।
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इसके बाद उनके चाचा शिवपाल भी मुस्लिमों की पसंद हो सकते थे, लेकिन सपा ने शिवपाल के बेटे आदित्य यादव को यहां से पार्टी प्रत्याशी बनाया है। तब से मुस्लिम समाज में सपा के प्रति रुझान और भी कम होता दिख रहा है। अब मुस्लिम खां को बसपा ने टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा है। हालांकि मतदाताओं के रुख की वास्तविकता तो चुनाव परिणाम आने पर ही पता चल सकेगी, लेकिन सपा को नुकसान होना तय माना जा रहा है।

सपा के बेहद करीबी रहे हैं मुस्लिम खां

मुस्लिम खां बसपा से विधायक रहे। वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव भी उन्होंने शेखूपुर सीट से बसपा के टिकट पर लड़ा, लेकिन हार गए। वह सपा के भी करीबी रहे हैं। कई वर्षों तक सपा में शामिल रहे। ऐसे में बसपा ने उनको प्रत्याशी बनाकर सपा को करारा झटका दिया है। मुस्लिम खां का बसपा से नाम सामने आते ही समाजवादी पार्टी में बेचैनी बढ़ गई है।


बसपा में 2002 में हुए थे शामिल

वर्ष 2002 में बसपा से जुड़े थे। वर्ष 2007 में बसपा से उसहैत विधानसभा सीट से चुनाव जीते थे। 2009 में परिसीमन के बाद उसहैत विधानसभा खत्म हुई और शेखूपुर विधानसभा सीट बनी। वर्ष 2012 के चुनाव में पार्टी ने एक धर्मगुरु से विवाद के बाद मुस्लिम खां को टिकट नहीं दिया तो उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा। इसमें वह दूसरे स्थान पर रहे। बसपा प्रत्याशी काजी रिजवान तीसरे नंबर पर चले गए। यह पहली बार हुआ, जब पहले और दूसरे स्थान पर रहने वाली बसपा तीसरे स्थान पर पहुंच गई थी।


चुनाव हारने के बाद सपा में हो गए थे शामिल

वर्ष 2012 का चुनाव हारने के बाद मुस्लिम खां सपा में शामिल हो गए। सपा से शेखूपुर सीट से टिकट मांगा, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया। 2022 में जब सदर विधानसभा से आबिद रजा का सपा ने टिकट काटा और शेखूपुर से हिमांशु यादव को टिकट दिया गया तो उन्होंने बसपा में वापसी कर ली। बसपा ने उन्हें शेखूपुर से टिकट दिया, लेकिन वह हार गए। अब बसपा ने लोकसभा चुनाव में उन पर भरोसा जताया है।


लोगों के साथ मेरा मजबूत जुड़ाव ही जीत का आधार बनेगा। साल 2014 में भी बसपा नेतृत्व ने मुझे बदायूं लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था, लेकिन तब सेहत खराब थी। मुझे ऑपरेशन कराना पड़ा था, इसलिए वह चुनाव नहीं लड़ सके थे। तब दूसरा उम्मीदवार बनाया गया था। अब फिर से बसपा सुप्रीमो ने मुझे चुनाव लड़ने के लिए आशीर्वाद दिया है। - मुस्लिम खां, पूर्व विधायक, बसपा
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