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Budaun News: काला और नीला पत्ता बताकर मिल रहीं प्रतिबंधित दवाइयां

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बदायूं। जिले में कुछ मेडिकल स्टोर पर प्रतिबंधित दवाइयां केवल काला और नीला पत्ता बताकर मिल जाती हैं। मेडिकल संचालक यह दवा उन्हीं ग्राहकों को देते हैं जो रोजाना इनका इस्तेमाल करते आ रहे हैं। ऐसे ग्राहकों को संचालक पहचान लेते हैं और देखते ही पत्ता निकालकर दे देते हैं। अनजान व्यक्ति अगर यही दवा लेने जाए तो साफ मना कर दिया जाता है। नशे के लिए प्रयोग की जाने वाली दवाइयों की बिक्री बिना डाॅक्टरों के पर्चे पर की जा रही है।
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मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल के सामने और बिसौली में संचालित कुछ मेडिकल स्टोरों पर पड़ताल की। ग्राहक भेजे गए तो पता लगा कि अनजान को प्रतिबंधित दवा नहीं देते हैं। मेडिकल कॉलेज के सामने एक व्यक्ति को भेजा गया तो संचालक ने कहा पहले दवा मिल जाती थी लेकिन अब नहीं आ रही है। जिला अस्पताल के सामने दवा लेने भेजा गया। यहां संचालक ने पहले पूरी जांच पड़ताल की और फिर दोगुने दाम पर शाम को चुपचाप दवा ले जाने की बात कही।
बिसौली कस्बे में पड़ताल के दौरान यहीं के रहने वाले एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह इन कैप्सूलों का इस्तेमाल करता आ रहा है। यहां ऐसे दर्जन भर से अधिक लोग हैं। जो नशे की दवा ले रहे हैं। मेडिकल संचालक इनके अलावा अन्य किसी को दवा देने से मना कर देते हैं। यहां चार पांच मेडिकलों पर काला पत्ता और नीला पत्ता कहने पर इन लोगों को दवा मिल जाती है। कैप्सूल पांच रुपये का आता है लेकिन यहां 20 रुपये में दिया जाता है।
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स्थान- मेडिकल कॉलेज के सामने
ग्राहक, काले पत्ते की दवा चाहिए
संचालक, मिलती थी अब नहीं मिलती।
ग्राहक, कब से बंद हो गई, सहसवान में तो कल ही ली थी।
संचालक, जहां से ली थी वहीं से जाकर ले लो।

स्थान- जिला अस्पताल के सामने
ग्राहक- नीले पत्ते वाली दवा का पैकेट कितने का है।
संचालक, कौन सा नीला पत्ता
ग्राहक, नशे वाला
संचालक, प्रतिबंधित है, कौन खाता है।
ग्राहक, हम खाते हैं
संचालक, अब तक कहां से लेते थे।
ग्राहक, बाहर रहता हूं वहीं से लेता था।
संचालक, तो वहीं से लेना, यहां बिना जान पहचान के नहीं मिलती।
ग्राहक- मिल जाती तो ठीक है नहीं तो 100 रुपये खर्च करके जाना पड़ेगा।
संचालक- चुपचाप आना शाम को ले जाना, सौ रुपये की छह गाेली मिल जाएंगी। किसी को पता न चले।
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नशे के लिए होता है इनका उपयोग
पेंटविन इंजेक्शन, कोरेक्स सीरप और स्पाजमो प्राक्सीवान कैप्सूल, एलप्रैक्स गोली का नशे के लिए उपयोग किए जा रहे हैं। यह सभी दवा पिछले दो सालों से प्रतिबंधित हैं। इसके बाद भी इन दवाओं का निर्माण हो रहा है। ऐसा पता लगा है कि जो कंपनी इन दवाओं को बनाती थी वो नहीं बना रही हैं, नकली दवाओं के कारोबारी इन दवाओं को बनवा रहे हैं। कुछ मेडिकल स्टोर संचालक इनको बेचने का काम कर रहे हैं। इनके अलावा भी सौ से अधिक दवाएं प्रतिबंधित हैं। जो चुपचाप बेची जा रही हैं।



छापेमारी में नहीं मिली नशे की गोलियां
ड्रग इंस्पेक्टर लवकुश प्रसाद ने बताया कि अभी होली के समय में ही यहां आकर चार्ज संभाला है। अगर किसी मेडिकल स्टोर पर प्रतिबंधित दवा बिकतीं हैं तो गाेपनीय जांच कराने के बाद कठोर कार्रवाई की जाएगी। अब तक छापेमारी में ऐसा कुछ मिला भी नहीं है। अगर किसी मेडिकल पर प्रतिबंधित दवा बिकती पाई जाती हैं तो औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत कार्रवाई होगी। साथ ही लाइसेंस भी निरस्त होगा।
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