कछला घाट से गंदगी साफ करते कर्मचारी। संवाद
- माघ पूर्णिमा पर स्नान-पूजन के लिए गंगातट पर जुटे थे 04 लाख से अधिक श्रद्धालु
- दूसरे दिन सफाई हुई तो कूड़े से भर गईं 15 से अधिक ट्रॉलियां
संवाद न्यूज एजेंसी
उझानी। आस्था के नाम पर अपने ही गंगाघाट पर गंदगी फैलाने से गुरेज नहीं करते। कछला घाट पर ऐसा ही रविवार सुबह देखने को मिला। नगर पंचायत के कर्मचारियों ने झाडू लगवा कर कूड़े के ढेर उठाने शुरू किए तो 15 से अधिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियां फुल हो गईं।
माघ पूर्णिमा पर शनिवार दोपहर बाद तक चले गंगा स्नान के बाद जैसे ही श्रद्धालु अपने घरों की ओर निकले, आस्था के नाम पर गंदगी से जुड़े खिलवाड़ के निशान साफ दिखाई देने लगे। घाट किनारे हवन-पूजन के बाद कचरे के ढेर लगे थे। पुरोहितों में नंदकिशोर ने बताया कि गंगा स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं में कई ऐसे भी होते हैं, जो घरों से हवन की राख और देवी-देवताओं के फटे-पुराने पोस्टर गंगा में प्रवाहित कर जाते हैं। यही नहीं, घाट पर हवन- पूजन की रख को भी गंगा में बहा दिया जाता है। सबसे ज्यादा दिक्कत घाट पर पॉलीथिन का इस्तेमाल बढ़ जाने से हो रहा है। पॉलीथिन के खिलाफ गंगा प्रेमियों ने अभियान भी चलाया था, फिर भी रविवार को नगर पंचायत के सफाई कर्मी झाडू लगवाने को पहुंचे तो सबसे ज्यादा ढेर पॉलीथिन के लगे मिले।
कछला घाट के सफाई प्रभारी कुलदीप कुमार के मुताबिक- सफाई के लिए 20 कर्मचारियों को लगाया गया। इस दौरान गंदगी से करीब 15 ट्रैक्टर- ट्रॉलियों भर गईं। कूडा-करकट दूर जाकर गड्ढों एमआरएफ सेंटर पर अनलोड किया गया।
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जागरूकता की जरूरत
श्रद्धालुओं को खुद भी जागरूक होना होगा। वह हवन-पूजन के बाद अगर राख को गंगा में बहाने की बजाय घाट से दूर भू-विसर्जन कर दें तो जलधारा निर्मल बनी रहेगी। हरेक को इस ओर गौर करना होगा। इसके बाद घाट भी साफ और स्वच्छ दिखेगा। -अशोक तोमर, गंगा प्रेमी