दातागंज। क्षेत्र में आई बाढ़ से दो दर्जन गांव के करीब 20 हजार की आबादी प्रभावित है। हाल यह है कि जानवरों का भूसा पानी में बह गया है। कटरी क्षेत्र में पानी भरा होने के कारण वह जानवरों को चराने नहीं ले जा पा रहे। हरा चारा पानी में डूब गया है। वहीं स्कूल में पानी भरा होने के कारण वह स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। रास्ते में पानी भरा होने के कारण इन गांवों का तहसील मुख्यालय से संपर्क कट गया।
कटरी किनारे गांव की हालत यह है कि लोग खेतों पर नहीं जा पा रहे हैं। खेतों में तीन से चार फुट तक पानी भरा है। हालांकि अब पानी कम होना शुरू हुआ है, लेकिन हालात अब भी अच्छे नहीं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि घरों के अंदर पानी न आने से खाने की तो कोई दिक्कत फिलहाल नहीं है, लेकिन जानवरों को चारा नसीब नहीं हो पा रहा है।
ग्रामीणों ने घरों के बाहर कुटिया बनाकर उसमें भूसा रख रखा था, वह बाढ़ के पानी में बह चुका है। ग्रामीण जानवरों को चराने के लिए कटरी में ले जाते थे, अभी वहां भी पानी भरा हुआ है।
पांच दिन से अंधेरे में हैं 40 गांव
दातागंज क्षेत्र के करीब 40 गांव ऐसे हैं जो बाढ़ के पानी से किसी न किसी स्तर पर प्रभावित हैं। इनमें अधिकांश मझरें हैं। 16 गांवों में पानी आ गया हैं। इन सभी गांवों में पांच दिन से अंधेरा है। खेतों से लेकर सड़कों पर पानी होने की वजह से बिजली आपूर्ति पूरी तरह से ठप है। जब तक पानी सूख नहीं जाता तब तक इन गांवों को अंधेरे में ही समय बिताना होगा। लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य सेवाएं भी बेहाल
बाढ़ के कारण कटरी क्षेत्र में लोग स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुंडरा मझरा, लालापुर खादर बंद पड़े हैं। म्याऊं व दातागंज सीएचसी खुली है, लेकिन रास्तों में पानी भरा होने के कारण लोग यहां तक नहीं आ पा रहे।
प्राथमिक विद्यालयों में पड़े हैं ताले
बीते एक सप्ताह से बच्चे विद्यालयों में नहीं गए हैं। वजह यह है कि वहां पानी भरा है। इसके साथ ही गांव के बाहर स्कूल जाने वाले रास्ते में पानी भरा है। न तो शिक्षक ही विद्यालय जा पा रहे हैं न ही बच्चे। जरतौली, हर्ररामपुर, नवादा बदन आदि प्राथमिक विद्यालयों में ताले पड़े हुए हैं।
ट्यूब के सहारे चार किमी तैरकर जाएंगे खेत तक : दीपक
नगरिया खनू गांव के दीपक ने बताया कि उनका खेत गांव से चार किलोमीटर दूर है। गांव के बाहर से खेत तक पानी भरा है। खेत तक जाने का कोई सहारा नहीं है, लिहाजा ट्यूब से जाएंगे। कंधे पर ट्यूब डालकर जाते समय दीपक ने बताया कि खेत में चरी बोई थी। सब पानी में डूब गई। भूसा बाढ़ के पानी में बह गया। चार जानवर है। उनके खाने पीने की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है।
पानी में बह गया जानवरों का भूसा : रामपूरन
नगरिया खनू के रामपूरन ने बताया कि उनके गांव तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। पानी अभी घर के अंदर नहीं आया। दस जानवर पाल रखे हैं। अपने खाने-पीने की दिक्कत तो नहीं है, लेकिन जानवरों के खाने-पीने की समस्या सामने आ रही है। घर के बाहर जानवरों का भूसा पड़ा था, सब पानी में बह गया। जानवरों को चराने कटरी में भी नहीं ले जा सकते। सब जगह पानी भरा हुआ है।
आठ बीघा में लगाई थी मिर्च, पानी में डूबकर हो गई बर्बाद : उमेश
धमीपट्टी गांव के उमेश पंडित ने बताया कि मिर्च, धान व बाजरा बोया था। आठ बीघा में मिर्च लगाई थी। 70 हजार खर्च हुए थे। पांच-छह बीघा में धान व तीन-चार बीघा में बाजरा बोया था। सभी फसलें बर्बाद हो गईं। चार जानवर हैं। पशुओं के खिलाने के लिए चारा था वह सब बाढ़ के पानी में चला गया।
प्रशासन का दावा : अब तक 5037 बाढ़ राहत पैकेट बांटे
बदायूं। रामगंगा में आई बाढ़ की वजह से दातागंज क्षेत्र के कुंडरा मझरा, कटकौरा, शेरपुर, लालपुर खादर, मौजमपुर, हर्रामपुर, नवादा वदन, गढिया पैगंबरपुर और देयोरनिया व गंगा नदी का जटा गांव प्रभावित हैं। प्रशासन की तरफ से इन गांव के 21,195 लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं।
एडीएम वित्त एवं राजस्व डॉ. वैभव शर्मा ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में अब तक 5037 राहत सामग्री पैकेट का वितरण किया जा चुका है। इसके अलावा जटा गांव में कम्यूनिटी किचन भी संचालित की जा रही हैं। जिले में 21 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। बाढ़ प्रभावित गांवों में 30 नावें, चार स्टीमर व एक पीएससी की टीम तैनात की गई है।
40 गोताखोरों की तैनाती पूर्व से की जा चुकी है। बाढ़ प्रभावित दातागंज क्षेत्र के 180 किसानों को 19,01,637 रुपये का अनुदान दिया गया है। इसके अतिरिक्त 21 राहत शिविर संचालित हैं। पशुओं के लिए पशु चिकित्सा विभाग की ओर से अब तक 326 शिविर लगाकर 26,939 पशुओं का उपचार और 61,275 पशुओं का टीकाकरण किया गया है। मेडिकल टीम ने 28,419 व्यक्तियों का उपचार अब तक किया गया है। संवाद
दातागंज के हर्रामपुर गांव में बाढ़ के पानी में डूबीं फसल। संवाद
दातागंज के हर्रामपुर गांव में बाढ़ के पानी में डूबीं फसल। संवाद
दातागंज के हर्रामपुर गांव में बाढ़ के पानी में डूबीं फसल। संवाद