बिसौली। कोट गांव में मेरठ से आई भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की तीन सदस्यीय टीम ने ऐतिहासिक टीले और मूर्तियों की जांच की। टीम के अनुसार मूर्तियां प्रथम दृष्टया मूर्तियां शुंग कुषाण काल की प्रतीत हो रही हैं, जो लगभग छह सौ से दो हजार वर्ष पूर्व की हैं।
गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए मिट्टी की जरूरत पूरी करने के लिए ग्राम कोट के समीप एक ऐतिहासिक टीले की जेसीबी से खोदाई की जा रही है। कुछ दिनों पूर्व खोदाई में आधा दर्जन से अधिक मूर्तियां निकलीं थीं। इस पर डीएम मनोज कुमार के आदेश के बाद खोदाई रोक दी गई थी। इसकी रिपोर्ट मेरठ स्थिति भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सर्किल ऑफिस को भेज गई थी।
मंगलवार को मेरठ से तीन सदस्यीय टीम गांव कोट पहुंची। पुरातत्वविद भूपेंद्र, सहायक पुरातत्वविद विवेक कुमार व संरक्षण सहायक राजेश कुमार ने ऐतिहासिक टीले को देखा, साथ ही मिट्टी की भी जांच की। इसके बाद गांव के ही मंदिर में रखी मूर्तियों को बारीकी से देखा। टीम ने गांव वालों से भी बात की।
सहायक पुरातत्वविद विवेक कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्ट्या ये मूर्तियां शुंग कुषाण काल की हैं। इनका काल छह सौ से दो हजार वर्ष के मध्य का लगता है। जो मूर्तियां मिली हैं, उनमें उमा महेश्वर और भगवान बुद्ध की मूर्ति है। अन्य मूर्तियां पूरी नहीं हैं। ये सभी मूर्तियां ऐतिहासिक दृष्टि से अमूल्य हैं। उन्होंने बताया कि पूरी जांच रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। इसे उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा।