बदायूं। शहर के सुंदरनगर मोहल्ले से शुक्रवार दोपहर आईबी के एक कथित अधिकारी को सिविल लाइंस थाना पुलिस ने पकड़ लिया। उसके पास से एक आईकार्ड भी बरामद किया गया है। एसओजी और पुलिस टीम आरोपी से पूछताछ कर रहीं हैं।
इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) का कथित अधिकारी मूलरूप से अलापुर थाना क्षेत्र के गांव पतसा का रहने वाला है। उसके आईकार्ड में अमृत पाल सिंह पुत्र यशपाल सिंह नाम लिखा है। सूत्रों के मुताबिक अमृत पाल काफी समय से सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के मोहल्ला सुंदर नगर में जगपाल सिंह यादव के मकान में किराये पर रहता था। वह अक्सर बनठन कर कमरे से निकलता था। अधिकारी के लहजे में लोगों से बात करता था। कुछ दिन पहले मकान मालिक ने उससे उसके काम के बारे में बात की थी। तब उसने खुद को इंटेलीजेंस ब्यूरो का असिस्टेंट सेंट्रल इंटेलीजेंस ऑफिसर द्वितीय बताया था। उसकी इंटेलीजेंस ब्यूरो में तैनाती है। वह ब्यूरो के लिए काम करता है। लेकिन मकान मालिक को उसकी बात पर विश्वास नहीं हुआ। मकान मालिक ने उसके बारे में छानबीन शुरू कर दी। इंटेलीजेंस ब्यूरो में गिने चुने लोग काम करने वाले हैं। कोई स्थानीय व्यक्ति नहीं है। कर्मचारी दूसरे जिलों से आए हैं। उन्हें लगा कि अमृतपाल कोई फर्जीवाड़ा करता है। उन्होंने शुक्रवार दोपहर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने युवक को पकड़ लिया। उसके पास से आईकार्ड, कुछ और भी चीजें बरामद हुई हैं। एसओजी और इंटेलीजेंस ब्यूरो के साथ थाना पुलिस भी पूछताछ कर रही है। पुलिस इस मामले में कुछ भी कहने से बच रही है।
आईटी का अच्छा जानकार बताया जा रहा युवक
एक अधिकारी के अनुसार अमृतपाल आईटी का अच्छा जानकार है। वह ऑनलाइन ठगी भी करता है। ओटीपी और पासवर्ड आदि भी हैक कर लेता है। लोगों के खातों से रुपये उड़ा लेता है। इसके अलावा यह भी बताया जा रहा है कि इस समय एसआईबी का जगह-जगह छापा चल रहा है। अमृतपाल उसका भी फायदा उठाकर लोगों को चूना लगा रहा है। अब तक उसने क्या-क्या फर्जीवाड़ा किया है, यह पुलिस की छानबीन के बाद ही पता चलेगा।
सिविल लाइंस पुलिस दबाने पर जुटी मामला
सुंदरनगर इलाके से पकड़े गए फर्जी अधिकारी के संबंध में सिविल लाइंस पुलिस पर्दा डालने में लगी है। जहां एक ओर एसओजी उससे पूछताछ कर रही है, वहीं दूसरी ओर थाना पुलिस मामला दबाना चाह रही है। इंस्पेक्टर राजेश कुमार भी मामले में कुछ बताने को तैयार नहीं हैं।
सिविल लाइंस इलाके से एक युवक पकड़ा गया है। उससे थाने में पूछताछ की जा रही है। जब तक सभी बातें साफ न हो जाएं, उससे पहले कुछ बताना ठीक नहीं है। आलोक मिश्रा, सीओ सिटी