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Budaun News: खाताधारक का पता चला न फर्जी एसीपी का

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उझानी। सराफ आलोक अग्रवाल से ठगी के मामले में फर्जी एसीपी और खाताधारक राहुल यादव की लोकेशन ट्रेस कर दोनों को गिरफ्तार करने के लिए जबलपुर गई पुलिस की टीम बैरंग लौट आई। अभी तक की जांच में पता चला है कि खाताधारक हरियाणा का है। अब पुलिस ने आगे की तफ्तीश के लिए दूसरी टीम बनाई है।
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नगर निवासी सराफ आलोक अग्रवाल से ठगी के बाद एसएसआई मनोज कुमार के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम बृहस्पतिवार देर शाम राजस्थान के जबलपुर जिले के लिए रवाना हो गई थी। तीन दिन तक पुलिस की इस टीम ने जबलपुर के कई इलाकों में छानबीन की। टीम न तो फर्जी एसीपी की लोकेशन ट्रेस कर पाई और न ही खाताधारक राहुल यादव के बारे में कोई और जानकारी जुटा पाई। बताते हैं कि खाताधारक राहुल का जबलपुर जिले में ही एसबीआई की शाखा में खाता है, लेकिन वह हरियाणा प्रदेश का निवासी बताया जा रहा है। तीन दिन के दौरान फर्जी एसीपी का मोबाइल फोन कई बार ऑन भी हुआ। सराफ से शनिवार को बात भी हुई, फिर फोन को बंद कर लिया गया।बताते हैं कि शुक्रवार को फर्जी एसीपी के बारे में पुलिस को कुछ जानकारी जरूर मिली थी। इसके बाद फिर मोबाइल बंद कर लिए जाने से पुलिस कर्मी भटक गए थे।

एक और व्यापारी से फर्जी दरोगा ने की ठगी की कोशिश
- साहूकारा मोहल्ला निवासी व्यापारी केशव गर्ग को फर्जी दरोगा ने रविवार दोपहर ठगने की कोशिश की। गर्ग के मोबाइल के व्हाटसएप पर आई ऑडियो कॉल के जरिये कॉलर दिल्ली पुलिस में दरोगा बताकर उनके बारे में जानकारी की। इसके बाद उनके एक बेटे को पुलिस की गिरफ्त में बताकर छोड़ने के नाम पर 40 हजार रुपये मांगे। एक खाता नंबर भी दिया गया, जो किसी रेखा सिंह के नाम से बताया जा रहा है। गर्ग ने अपने छह बेटे बताकर फर्जी दरोगा को ही चकमा दे दिया। वास्तव में उनका एक बेटा है। फर्जी दरोगा की दाल नहीं गली तो उसने फोन स्विच ऑफ कर लिया। बता दें कि इससे पहले कई और व्यापारियों को भी ठगी का शिकार बनाने की कोशिश की जा चुकी है। सराफ आलोक अग्रवाल और पशुधन प्रसार अधिकारी योगेश कुमार सिंह तो शिकार भी बन चुके हैं।
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डीएम का फोटो लगी आईडी से आया फर्नीचर बेचने का मैसेज
आयुर्वेदिक दवाओं के थोक विक्रेता अभिनव सक्सेना के मैसेंजर पर रविवार पूर्वाह्न डीएम मनोज कुमार की फोटो लगी आईडी से मैसेज आया कि सीआरपीएफ अफसर अपने घर का फर्नीचर बेचना चाहते हैं, जो बहुत अच्छा है। उनसे बात कर फर्नीचर खरीद सकते हैं। इस मैसेज के बाद मामला अफसरों के संज्ञान में पहुंचा। बताते हैं कि डीएम ने साइबर सेल को मामले की छानबीन में लगाया है।
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