बदायूं। जिले में युवा अवसाद ग्रस्त होते जा रहे हैं। इसका इससे ही अंदाजा लगा सकते हैं कि अगस्त में 20 युवाओं ने अवसाद ग्रस्त होकर मौत को गले लगा लिया, जिन लोगों ने आत्महत्या की इनमें अधिकांश की उम्र 19-20 साल से 26-27 साल की रही होगी।
अगस्त में कुंवरगांव कस्बे के वार्ड नंबर नौ निवासी जीशान (26) ने फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने बताया कि वह कई दिन से अवसाद में था। इसी कारण आत्मघाती कदम उठा लिया। वहीं सहसवान कोतवाली क्षेत्र के सुकर्रा गांव में गंगा किनारे एक युवक का शव फंदे से लटका मिला। उसकी पहचान कासगंज के शाहवर थाना क्षेत्र के गांव जमालपुर निवासी अमरपाल पुत्र इंद्रपाल के रूप में हुई थी।
परिजन ने बताया कि अमरपाल कई दिनों से अवसाद में चल रहा था। 31 अगस्त की रात बिनावर थाना क्षेत्र के गांव पलिया झंडा निवासी राहुल (25) पुत्र वीरपाल ने अवसाद में आकर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। इस तरह से अगस्त महीने में करीब 20 युवाओं ने अवसाद ग्रस्त होकर आत्महत्या कर ली।
परिवार का माहौल रखें खुशनुमा, बच्चों के लिए समय निकालें अभिभावक
जिला अस्पताल की मनोवैज्ञानिक डॉ. सर्वेश कुमारी ने इस बारे में बताया कि आज का युवा अपेक्षाकृत कहीं अधिक सुविधा संपन्न है। इसके बावजूद वे तनाव, कुंठा, चिंता व अवसाद से घिर जाते हैं। लगातार उदासी, खराब मूड या चिड़चिड़ापन और कम से कम दो सप्ताह तक सामान्य गतिविधियों में रुचि न लेना या किसी बात में खुशी अनुभव न होना आदि अवसाद के मानसिक लक्षण हैं। इसके साथ शारीरिक लक्षण भी हैं जैसे- नींद में खलल, थकान व बेचैनी आदि। इसके लिए काफी हद तक परिवार भी जिम्मेदार है। बच्चों के लिए भी अभिभावक समय निकालें। अपने बच्चों की भावनाओं, उलझनों, हताशा, निराशा व परेशानियों के बीच भावनात्मक संबल की एक मजबूत कड़ी जोड़ने की जरूरत है। युवा हो रहे किशोरों से बातचीत करें। उनसे दोस्तों की तरह व्यवहार करें। जिससे कि वह सारी बातें आपको बता सकें। घर का माहौल खुशनुमा रखे। जिससे अगर घर का कोई सदस्य तनाव में है तो उसे बाहर की अपेक्षा घर में समय बिताना ज्यादा अच्छा लगे। ऐसे में अनहोनी को रोका जा सकता है।