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बाजार में 41 तरह के कोडीन फॉस्फेट युक्त कफ सीरप, खूब हो रही बिक्री 18-54-33

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बदायूं। खांसी की दवाओं का इस्तेमाल नशे के लिए किया जा रहा है। मेडिकल स्टोर संचालक युवा पीढ़ी को बर्बाद कर मुनाफा कमाने में लगे हैं। नारकोटिक्स और ड्रग विभाग कार्रवाई के नाम पर एकदूसरे को जिम्मेदार बता रहे हैं। बाजार में करीब 41 तरह के कफ सीरप हैं। ज्यादातर में कोडीन फॉस्फेट का साल्ट है जो प्रतिबंधित है। बिना डॉक्टर के परामर्श के यह दवा नहीं मिल सकती पर यहां नियम दरकिनार हैं।
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नशे के कारोबार पर रोक की जिम्मेदारी नारकोटिक्स, ड्रग विभाग के साथ आबकारी विभाग की भी होती है। मेडिकल स्टोर के लाइसेंस जारी करने का काम ड्रग विभाग करता है। मेडिकल स्टोर पर बिकने वाली दवाओं के कुछ मामलों में नारकोटिक्स विभाग को भी कार्रवाई का अधिकार है, लेकिन मूल जिम्मेदारी ड्रग विभाग की ही होती है। खांसी और दर्द की दवाओं के रूप में जिले भर में मेडिकल स्टोर नशे का कारोबार कर रहे हैं। कोडीन फॉस्फेट का साल्ट यूं तो खांसी में राहत देता है लेकिन डोज ज्यादा हो जाए तो दवा से जहर बन जाता है। इसका इस्तेमाल बड़े स्तर पर नशे के लिए किया जा रहा है। गौर करने की बात यह है कि जिले में बड़े स्तर पर इस प्रकार की दवाओं की बिक्री बिना डॉक्टर के पर्चे के हो रही है। बड़े स्तर पर इस तरह की दवाओं को मेडिकल स्टोर संचालक खपाकर मुनाफा कमा रहे हैं।
एक मेडिकल स्टोर संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कोडीन फॉस्फेट युक्त 100 एमएल के कफ सीरप की अधिकतम कीमत 165 रुपये है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार सुबह और शाम पांच-पांच एमएल सीरप लिया जाना चाहिए। टीबी, दमा और खांसी में यह फायदेमंद होता है, लेकिन कई मेडिकल स्टोर संचालक 200 रुपये तक का एक कफ सीरप बेच रहे हैं। जानकारों के मुताबिक इसमें शराब से ज्यादा नशा होता है। खास कर युवा वर्ग इन सीरप को ज्यादा खरीद रहा है।
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मेडिकल स्टोर संचालकों को कोडीन फॉस्फेट युक्त दवाओं की बिक्री का पूरा रिकार्ड रखना चाहिए। इस प्रकार की दवाओं को लेकर पिछले दिनों ही हाईकोर्ट का आदेश आया है। उसके बाद कोडीन फॉस्फेट युक्त सीरप आदि की बिक्री पर कार्रवाई को लेकर नारकोटिक्स विभाग का वह अधिकार नहीं रहा है। हालांकि, नारकोटिक्स विभाग को अब भी ट्रामाडोल, डायजीपॉम, अल्पारेक्स जैसी दवाओं की बिक्री को लेकर अधिकार है। अगर इन दवाओं की बिक्री होती है तो नारकोटिक्स विभाग कार्रवाई कर सकता है। उनको ऐसे मामलों में लाइसेंस निरस्त करने का अधिकार है।-एलआर दिवाकर, नारकोटिक्स अधिकारी
कोडीन फॉस्फेट युक्त दवाओं का इस्तेमाल खांसी के अलावा दर्द में भी होता है। कुछ दवाएं बाजार में बिक रही हैं। मेडिकल स्टोर संचालकों को इनका रिकार्ड रखना चाहिए और यह दवाएं बिना डॉक्टर के पर्चे के नहीं देनी चाहिए। ड्रग विभाग ऐसे मामलों में लगातार कार्रवाई करता है। नारकोटिक्स विभाग की भी जिम्मेदारी बनती है। कोडीन फॉस्फेट युक्त खांसी के सीरप में कितना नशा होता है इस बारे में नहीं कह सकता। अगर बिना डॉक्टर के पर्चे के इसकी बिक्री हो रही है तो कार्रवाई की जाएगी। - विवेक कुमार, ड्रग इंस्पेक्टर
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