बदायूं। खाद्य एवं औषधि विभाग की टीम ने एक अप्रैल से 23 मार्च 2024 तक 418 नमूने विभिन्न खाद्य सामग्रियों के भरे। सभी नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए। विभाग के अनुसार अब तक आई जांच रिपोर्ट में 247 नमूने फेल पाए गए हैं। दोषी दुकानदारों पर 16.42 लाख का जुर्माना लगाया गया है। 97 मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं। सजा जैसी कोई कार्रवाई न होने से मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हैं।
अप्रैल 2023 से 23 मार्च 2024 तक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की जांच में 140 दुकानदार मिलावटखोरी करते पकड़े गए। इन दुकानों से 418 नमूने लिए गए, जिनमें 247 नमूने फेल हो गए। विभाग ने इनके खिलाफ चल रहे मामलों का निस्तारण करते हुए सभी पर 16.42 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।
नियम यह है कि जब खाद्य पदार्थ का नमूना फेल हो जाता है तो उसके विक्रेता, निर्माता प्रतिष्ठान को अधिनियम की धारा 46(4) के तहत नोटिस जारी किया जाता है। इसमें कहा जाता है कि अगर वह केंद्रीय प्रयोगशाला में उस जांच रिपोर्ट को चैलेंज करना चाहता है तो अपील करें। अगर वह अपील करता है तो जांच लैब में भेज दी जाती है। इसके लिए निर्धारित फीस पार्टी को देनी पड़ती है। अपील न करने पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाती है।
छह-छह साल में रिपोर्ट का निर्णय नहीं
विभाग का दावा है कि नमूने की जांच रिपोर्ट आने के बाद तीस दिन का समय दुकानदार को दिया जाता है। अगर जवाब नहीं मिलता है तो रिपोर्ट दर्ज करा दी जाती है। वित्तीय वर्ष में हुई कार्रवाई का विवरण विभाग द्वारा सार्वजनिक कर दिया गया है।
जुर्माने के अलावा कोई कार्रवाई नहीं
अगर किसी मिलावटखोर का नमूना भरा जाता है तो दुकानदार भी समझ लेता है कि अधिक से अधिक जुर्माना ही लग सकता है। सालों से मिलावटखोरों को सजा नहीं सुनाई गई है। यही कारण है कि मिलावट करने वालों के हौसले बुलंद रहते हैं।
लगातार छापेमारी की जा रही है। नमूने लेकर उनको लैब में जांच के लिए भेजा जाता है। जो नमूने फेल होते हैं उनपर जुर्माना डाला जाता है। कुछ मामले कोर्ट में भी चलते हैं। 97 मामले कोर्ट में लंबित हैं। इनमें सजा का प्रावधान है। -सीएल यादव, आयुक्त द्वितीय खाद्य एवं औषधि विभाग, बदायूं