बिल्सी। आर्य समाज मंदिर गुधनी पर चल रही वेद कथा के तीसरे दिन कर्मफल व्यवस्था पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वेद कथा सुनाते हुए कथाकार आचार्य संजीव रूप ने कहा कि मनुष्य जो कर्म करता है वह दो प्रकार का होता है अच्छा और बुरा। दोनों ही प्रकार के कर्मों की फल ईश्वर के आधीन होता है। ईश्वर मनुष्य के कर्मों का फल अवश्य ही देता है। कर्मों के फल को प्राप्त करने से न कोई स्वयं रोक सकता है न कोई दूसरा व्यक्ति ही रोक सकता है। उन्होंने कहा कि मिर्ची का बीज बोकर धान कभी नहीं उगता है। गुलाब का फूल बोने पर गुलाब जरूर मिलता है। उन्होंने कहा कि भूत, प्रेत, नाना प्रकार की टोना टोटके की बातें सब मूर्खता पूर्ण बातें है। इसका कोई अस्तित्व नहीं होता है। इस मौके पर प्रज्ञा आर्य, महेंद्र आर्य, नेत्रपाल माथुर, सुधीर कुमार, अंशुल कुमार, सुखवीर, राकेश आर्य, भानुप्रकाश सिंह, विचित्रपाल, भुवनेश कुमार सिंह, दुर्वेश सिंह, सूरजवती, अनेक पाल आदि मौजूद रहे।