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Budaun News: दो लोकसभा चुनावों में 14877 मतदाताओं ने दबाया नोटा

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वर्ष 2014 के चुनाव में मिला था ‘उपरोक्त में से कोई नहीं’ चुनने का विकल्प
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अमर उजाला ब्यूरो
बदायूं। लोकसभा के दो चुनावों में 14,877 मतदाता ऐसे रहे जिन्होंने सभी 24 उम्मीदवारों को नापसंद किया। मतदान के वक्त नोटा (नन ऑफ द अबव) का विकल्प चुना। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में पहली बार नोटा का विकल्प मिला था। बदायूं लोकसभा क्षेत्र में 2014 के चुनाव में 15 उम्मीदवार थे। इस चुनाव में 6286 ( 0.36 फीसदी) मतदाताओं ने नोटा दबाया। उम्मीदवारों को प्राप्त मतों को सामने रखें तो नोटा चौथे स्थान पर रहा। इस चुनाव में 12 प्रत्याशियों को नोटा से कम वोट मिले थे।
साल 2019 में हुए चुनाव में 8609 (0.8 फीसदी) मतदाताओं ने सभी नौ उम्मीदवारों को नापसंद करते हुए नोटा का इस्तेमाल किया। नोटा चौथे स्थान पर रहा। छह प्रत्याशियों को नोटा से कम मत मिले थे। एनएमएसएन दास डिग्री काॅलेज में राजनीति शास्त्र के प्रवक्ता आशीष कुमार का कहना है कि मत देना मौलिक दायित्व है पर जब चुनाव मैदान में खड़े उम्मीदवार पसंद के न हों तो आखिर किसे वोट दिया जाए। इसी दुविधा का हल है नोटा। 10 साल पहले ईवीएम में नोटा का विकल्प आया। नोटा विश्व के 13 देशों में लागू है।
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बकौल आशीष कुमार, नोटा के कारण अलग-अलग होते हैं, लेकिन जहां तक वह समझते हैं, राजनीतिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार और जनप्रतिनिधि की जवाबदेही न होने की वजह से लोग नोटा अपनाते हैं। अगर कर्मचारियों, अधिकारियों की तरह नेताओं की भी जवाबदेही तय हो जाए तो मतदान का प्रतिशत बढ़ेगा और नोटा घटेगा।

2014 में नोटा ने आम आदमी पार्टी और महान दल को पीछे छोड़ा
महानदल- पगलानंद 5748
निर्दलीय मुंशीलाल 5651
निर्दलीय अतुल कुमार 4195
निर्दलीय हरभजन 4083
पीईसीपी-अजीतपाल सिंह 3421
आम आदमी पार्टी- हेमा मेहता 2861
आरएसएमडी- रीना 2065
लेबर पार्टी ऑफ इंडिया अनिल कुमार शर्मा 1993
आरपीआई ए संतोष कुमार गुप्ता 1448
वीएससीपी-मुनेंद्र पाल 860
आवीएमपी- वीरेंद्र पाल गुप्ता 810
एनपी- मदनलाल 791
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2019 में नोटा से पीछे रहे तीन दलीय और तीन निर्दलीय उम्मीदवार
एआईएफबी- कैलाश कुमार मिश्रा 4347
आईएनडी- स्वामी पगलानंद 4085
निर्दलीय- हरी सिंह 2637
निर्दलीय- कृपाशंकर शाक्य 2219
निर्दलीय- अतुल कुमार 1681
केएजेपी- महेश श्रीवास्तव 1336
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