युवाओं ने नौकरी की जगह खेती में तलाशी नई राह
बिजनौर। पारंपरिक खेती पद्धति को छोड़कर तकनीकी व नवाचार का प्रयोग किया, तो खेती फायदे का सौदा बनने लगी। यही कारण है कि युवाओं ने नौकरी की जगह खेती में नई राह तलाश ली है। कई युवा प्राइवेट नौकरी छोड़कर खेती में समृद्धि के फूल खिला रहे हैं, तो कई जैविक खेती कर रहे हैं। अब उनकी सामान्य की जगह आय दोगुनी हो गई है। जैविक खेती कर उसके प्रोडक्ट को बाजार व ऑनलाइन माध्यम से बेच रहे हैं। यह प्रगतिशील किसान अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा बने हुए हैं।
धामपुर क्षेत्र के गांव सीकरी निवासी सुधीर त्यागी के पुत्र लक्ष्य त्यागी ने प्राइवेट नौकरी की जगह पिता के साथ जैविक खेती को अपना लक्ष्य बनाया। उन्होंने जैविक खेती कर खर्च कम और उत्पादन अधिक प्राप्त कर अपनी आय दोगुनी कर ली है। लक्ष्य त्यागी ने बताया कि अपने उत्पादन बाजार में भेजने के लिए श्री सत्यओम कंपनी बनाई है। उसके माध्यम से जैविक उत्पादित पदार्थों के करीब 32 प्रोडक्ट बाजार में उतार रखे हैं। इसमें काला गेहूं, गन्ना, धान, सरसों, मूंग दाल आदि है। वह अपने प्रोडक्ट को बाजार के साथ ऑनलाइन, व्हाट्सएप के द्वारा सेल करते हैं। उनकी कंपनी को प्रशासन व कृषि विभाग की ओर पुरस्कार भी मिले हैं।
ग्राम अगरी निवासी प्रगतिशील किसान अखिलेश चौधरी कई साल से फूलों की खेती कर रहे हैं। अखिलेश चौधरी ने बताया वह एक नामचीन कंपनी में अच्छे पैकेज पर नौकरी करते थे। 2017 में नौकरी छोड़कर गुलदावरी, रजनीगंधा, ग्लेडियोलस आदि फूलों की खेती कर रहे हैं। उनके फूल स्थानीय बाजार के साथ दिल्ली, एनसीआर और उत्तराखंड के बाजार में सप्लाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोनाकाल में लॉकडाउन के समय उनकी फूलों की खेती प्रभावित हुई थी। जैसे ही हालात सामान्य हुए, उनकी फूलों का कारोबार फिर से चलने लगा है।
धामपुर क्षेत्र के गांव सीकरी में बाग में अमरूद के पेड़ को देखते किसान लक्ष्य त्यागी।- फोटो : BIJNOR