बिजनौर । सर्वांगीण विकास का माध्यम शिक्षा ही है। बेसिक शिक्षा विभाग ने जनपद के साढ़े पांच हजार ड्राप आउट बच्चों को चिन्ह्ति किया। फिर उनका विद्यालयों में प्रवेश कराकर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया। शिक्षा विभाग अधिकारियों का दावा है कि जिले में साक्षरता दर बढ़ रही है।
वर्ष 2011 में हुई जनसंख्या गणना के आंकड़ों में जिले की साक्षरता दर में बढ़ोत्तरी हुई है। वर्तमान में भी शिक्षा का स्तर उठ रहा है। वर्ष 2011 की गणना के अनुसार जनपद की कुल साक्षरता दर 68.48 प्रतिशत चल रही है, जिसमें महिलाओं की 59.72 प्रतिशत और पुरुषों की दर 76.56 प्रतिशत है। जबकि वर्ष 2001 में हुई जनसंख्या गणना के आंकड़ों में जिले की साक्षरता दर 58 प्रतिशत थी। महिला साक्षरता की दर 46.1 प्रतिशत और पुरुषों की 68.78 प्रतिशत थी। प्रारंभिक शिक्षा के साथ, उच्च शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है।जिले में करीब 66 परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों का संचालन अंग्रेजी माध्यम से हो रहा है।
ग्रामीण अंचल में बनाएं छात्रावास
दूरदराज गांवों की छात्राओं के रहने के लिए जिले बने सात छात्रावास का निर्माण हुआ है। इनमें करीब पांच छात्रावास बेसिक शिक्षा विभाग और दो माध्यमिक विभाग के हैं। छात्राओं को कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों व अन्य नजदीक के विद्यालयों में प्रवेश दिलाया गया तथा उनके रहने की व्यवस्था छात्रावास है।
जनपद में शिक्षा का स्तर उठ रहा है। हाउस होल्ड सर्वे के अनुसार साढ़े पांच हजार छात्र-छात्राएं, दिव्यांग चिन्हित हुए थे। सभी को विद्यालयों में प्रवेश दिलाकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा गया। जो ज्यादा दिव्यांग है उन्हें घर पर पढ़ाया जा रहा है। उन्हें पढ़ने की सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है।
-जयकरन यादव, बीएसए