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पति की लंबी आयु के लिए महिलाएं रखेंगी तीज का व्रत

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सीमा गुप्ता। - फोटो : BIJNOR
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पति की लंबी आयु के लिए महिलाएं रखेंगी तीज का व्रत
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बिजनौर। हरियाली तीज का त्योहार श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि में मनाया जा रहा है। महिलाएं हरियाली तीज का व्रत पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं। हरियाली तीज पर सुहागिन महिलाएं सोलह शृंगार करके भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करेंगी।
सावन का महीना आते प्रकृति झूमने लगती है। चारों ओर हरियाली छायी रहती है। इसके साथ ही त्योहारों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। रविवार को शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का त्योहार मनाया जा रहा है। पंडित ललित शर्मा ने बताया कि तृतीया तिथि का शुभ मुहूर्त 3:01 से शुरू होकर एक अगस्त तक सुबह 4:19 मिनट तक रहेगी। सुहागिन महिलाओं के साथ-साथ कुंवारी कन्याएं भी योग्य वर की प्राप्ति के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। हरियाली तीज का उत्सव शिव पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। हरियाली तीज पर महिलाएं लोकगीत गाती हैं, झूला झूलती हैं। इसके साथ ही मान्यता है कि इस दिन श्री राधारानी बरसाना में अपने माता-पिता के घर जाती हैं और सखियों संग झूला झूलती हैं। साथ ही वृंदावन के मंदिरों में भगवान कृष्ण और राधारानी की मूर्तियों को हरे रंग के वस्त्रों से सजाया जाता है।
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धीमी पड़ी झूलों की पींगे, मंद पड़ रहा मल्हार
बिजनौर। यकीन मानिए, झूलों की पींगें धीमी पड़ रही है, मल्हार की गूंज भी मंद हो गई है। दरअसल बदलते दौर में तीज मनाने का भी तौर तरीका बदल गया है। अब आम के बागों में झूले दिखाई नहीं देते हैं। उल्लास का यह उत्सव शहर से गांव देहात तक महिलाएं एकत्र होकर मनाया करती थी, जोकि अब रस्म अदायगी तक ही सिमटता जा रहा है। बागों में भी झूले नहीं दिखाई देते। तमाम महिलाएं अपने अपने घरों में झूला डालकर पींगे बढ़ा लेती हैं। अब इस पीढ़ी की महिलाओं को पुराने दौर के मल्हार भी याद नहीं है। बुजुर्ग महिलाओं के संग जरूर गा लेती हैं।
मनोरंजन बनकर रह गई तीज
दो दशक पहले तक तीज का त्योहार आम के बगीचों में मनाया जाता था। अब बागों में झूले नजर अब हरियाली तीज का त्योहारा मनोरंजन बनकर रह गया है। केवल कुछ सखियों के साथ पार्टीनुमा तरीके से तीज मना ली जाती है। समय के साथ त्योहार मनाने में फर्क आया है।
-शाकुंभरी देेवी
तीज पर इकट्ठा होती थी सहेलियां
शादी के बाद अक्सर सहेलियों से मुलाकात नहीं हो पाती थी। तीज ही ऐसा त्योहार था, जब सभी अपने मायके आती और एक दूसरे मिलने का मौका मिलता था। महीनाभर पहले से तीज आने का इंतजार किया जाने लगता था। अब पहले जैसी बात नहीं रही।
-जयमाला कश्यप
घेवर की खुशबू रहती है याद
बचपन में कई दिनों तक पेड़ पर डाले गए झूले पर झूलते रहते थे। अब कई दिनों तक नहीं झूल पाते लेकिन तीज के दिन झूला जरूर झूलते हें। घेबर की खुशबू सालभर याद रहती है। तीज को लेकर वे बहुत खुश है, सहेलियों के संग त्योहार मनाएंगी।
-श्रेया रस्तौगी
तरीका बदलने पर भी परंपराएं पुरानी
यह बात तो ठीक है कि पुरानी वाली बात अब नहीं रही। पहले तीज पर अलग ही बात होती थी। पींग बढ़ाने की शर्त लगती थी। अब तरीका बदल गया है। झूले छोटे हो गए हैं। पेड़ के बजाए घरों में झूल लेते हैं। फिर भी परंपराएं पुरानी है।
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-सीमा गुप्ता
तैयारियों में जुटी रहीं महिलाएं, गुलजार रहे बाजार
आज हरियाली तीज का त्योहार है। जिसे लेकर महिलाओं ने पहले ही तैयारी शुरू कर दी थी। विवाहिता एक दिन पहले ही अपने मायके पहुंच गई। जिसे लेकर सड़कों और बसों में महिलाओं की भीड़ रही। बाजार में भी महिलाओं की भीड़ उमड़ी रही। महिलाओं ने सजने संवरने के लिए कॉस्मेटिक का सामान ही नहीं खरीदा बल्कि मनपसंद साड़ियां और कपड़े भी खरीदे। इसके अलावा मेहंदी लगवाने के लिए पार्लर पर भीड़ लगी रही। हरियाली तीज को लेकर बाजार में पिछले दो तीन दिनों से रौनक बनी हुई है। बाजार गुलजार हैं और दुकानों पर महिलाओं की भीड़ लगी रही। मिठाई की दुकानों पर घेवर की खरीदारी के लिए भीड़ लगी रही।

श्रेया रस्तौगी।- फोटो : BIJNOR

शाकुंभरी देवी।- फोटो : BIJNOR

जयमाला कश्यप।- फोटो : BIJNOR

चांदपुर के भगवंत पब्लिक स्कूल में आयोजित मेंहदी प्रतियोगिता में हाथों लगी मेंहदी दिखाती शिक्षि?- फोटो : BIJNOR

नगीना में वैश्य समाज महिला संगठन के तीज उत्सव कार्यक्रम में तीज क्वीन चुनी गई सोनी मित्तल सम्मान?- फोटो : BIJNOR

चांदपुर में एलएनएस क्लब चेष्टा के हरियाली तीज कार्यक्रम में तीज क्वीन बनी उषा।- फोटो : BIJNOR

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