बिजनौर। राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस 11 अप्रैल को मनाया जा रहा है। जिले में मातृत्व मृत्यु दर में कमी देखने को मिली है। पिछले कुछ सालों से गर्भवती महिलाओं की समय से जांच कराने पर ज्यादा जोर है। जांच बढ़ने पर पिछले दो साल के मुकाबले औसतन 14 गर्भवती महिलाओं की मृत्यु दर में कमी आई है।
राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस गर्भावस्था, प्रसव, प्रसव के बाद और गर्भवती को स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं की जानकारी देने के लिए मनाया जाता है। जिससे जच्चा-बच्चा को सुरक्षित रखा जा सके। साथ ही मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार दो साल पहले बिजनौर में एक लाख गर्भवती महिलाओं पर 162 महिलाओं की मौत हो रही है। मगर अब यह आंकड़ा घटकर 148 पर पहुंच गया है। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पिछले दो साल में 14 गर्भवती महिलाओं की मृत्यु दर में कमी आई है।
हर माह की नौ तारीख को अस्पतालों में होती है गर्भवतियों की जांच
सरकार की ओर से हर माह की नौ तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाने की शुरुआत की गई है। इस दिन गर्भवती महिलाओं की अस्पतालों में खून, रक्तचाप, वजन, हीमोग्लोबिन सहित कई जांच की जा रही हैं। समय-समय पर जांच होने से महिलाओं की बीमारी को दवाई देकर ठीक किया जा रहा है। सोमवार को जिले के सरकारी अस्पतालों में करीब 2200 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई।
पांच निजी अस्पतालों में गर्भवतियों का हो रहा निशुल्क अल्ट्रासाउंड
जिले के पांच निजी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं का निशुल्क अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है। यह सुविधा सरकार ने फरवरी से शुरू की है। इन अस्पतालों में गर्भवती महिलाएं ई-पर्ची के जरिए निशुल्क अल्ट्रासाउंड करा सकती हैं।
इन वजहों से होती है गर्भवती महिलाओं की मृत्यु
-घर पर ही असुरक्षित प्रसव कराने पर
-प्रसव के समय अस्पताल ले जाने में लापरवाही बरतने पर
-प्रसव के दौरान ज्यादा खून बहने से
-प्रसव के समय सेप्सिस होने से
जिले में सुरक्षित मातृत्व के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। शिविर लगाकर गर्भवती महिलाओं को सरकारी योजनाओं जानकारी भी दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग मातृत्व मृत्यु दर में कमी लाने के लिए प्रयास कर रहा है। मातृत्व मृत्यु दर में कमी भी आई है। - डॉ. विजय कुमार गोयल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बिजनौर