गर्मियों में घेर राम बाग तक नहीं पहुंचता पानी, टूटी हैं सड़कें
बिजनौर। दो साल पहले घेर राम बाग भी पालिका की सीमा में शामिल हुआ, लेकिन अभी तक शहरी सुविधाएं यहां तक नहीं पहुंची हैं। हालत गांव से भी बदतर है। गर्मियों में घेर राम बाग तक पानी नही पहुंच पाता। यहां की आबादी निजी हैंडपंपों पर निर्भर होने को मजबूर है। सिर्फ पानी की समस्या ही नहीं बल्कि सड़कें बदहाल हैं और नालियां टूटी हुई हैं।
घेर राम बाग को अब नगर पालिका परिषद के वार्ड नंबर सात के रूप में जाना जाता है, कभी यह आबादी मुकरपुर खेमा ग्राम पंचायत में शामिल थी। नगर पालिका का सीमा विस्तार हुआ तो घेर राम बाग की आबादी पर भी शहरी होने का तमगा लग गया। लोगों को आस जगी थी कि अब मोहल्ले का विकास होगा, सड़कें अच्छी हो जाएंगी। साथ ही साफ सफाई बेहतर होगी। लेकिन दो साल बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं।
कई मोहल्लों में नहीं पहुंची पाइप लाइन
नई आबादी जो पालिका की सीमा में शामिल हुई है। उसमें अधिकांश जगहों पर पाइपलाइन से पानी की आपूर्ति नहीं होती। दरअसल ये आबादी ग्राम पंचायतों में शामिल थी, जिनमें अभी तक पालिका पेयजल की आपूर्ति के लिए पाइपलाइन नहीं बना सकी है।
क्या कहते हैं लोग
सुजीत चौधरी बताते हैं कि घेर राम बाग की मुख्य सड़क टूटी हुई है। बरसात में सड़क पर पानी भर जाता है। नालियों में कीचड़ जमा है। नालियां भी टूटी हुई हैं। जिनके किनारे घास तक उगी हुई है। लोगों को संक्रमित बीमारियों का खतरा रहता है।
वीर सिंह ने बताया कि उनके मोहल्ले में जाटान की टंकी का पानी आता है सर्दियों में पानी की आपूर्ति ठीक रहती है लेकिन गर्मियों में उनके मोहल्ले तक पानी ही नहीं पहुंच पाता। उनके मोहल्त्ले में पानी की आपूर्ति के लिए एक नलकूप की जरुरत है।
अंकित कुमार ने बताया कि मोहल्ले के पानी की निकासी नहीं है। सड़क के किनारे ही यूं ही पानी भरा रहता है। बरसात होने पर सड़कों पर आ जाता है। पानी निकासी के लिए नाला भी नहीं बनाया गया है।
भोले चौधरी ने बताया कि शहरी आबादी होने की वजह से सड़कों पर लाइट लगी होनी चाहिए थी। रात में सड़कों पर अंधेरा पसर जाता है। पालिका में शामिल होने के बाद भी घेर राम बाग के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।