फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bijnor: 10 हजार बीघा से ज्यादा जमीन पर उत्तराखंड का कब्जा, हाईकोर्ट के आदेश पर हुई पैमाइश, अफसरों में तनातनी

Wed, 29 Mar 2023 12:35 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर

सार

बिजनौर और उत्तराखंड का सीमा विवाद अब किसानों के अलावा अफसरों के बीच भी बढ़ता नजर आ रहा है। मंगलवार को हाईकोर्ट के आदेश पर मंडावर गंगा खादर में बिजनौर के अफसरों ने भूमि की पैमाइश कराई। लंबे समय से सीमा विवाद बरकरार है। भूमि की पैमाइश की रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल की जाएगी। अब तक चार बार वार्ता विफल हो चुकी है। 
विज्ञापन
बिजनौर में उत्तराखंड सीमा पर जमीन की पैमाइश करते एसडीएम मोहित कुमार।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बिजनौर और उत्तराखंड का सीमा विवाद अब किसानों के अलावा अफसरों के बीच भी बढ़ता नजर आ रहा है। मंगलवार को एक बार फिर दोनों ओर के अफसरों को खादर में पैमाइश के लिए जुटना था। बिजनौर के एसडीएम, तहसीलदार तो पहुंचे, लेकिन उत्तराखंड की ओर सक्षम अधिकारी नहीं आए। विवाद बढ़ा तो उत्तराखंड से आए अफसरों ने पैमाइश कराने से ही इनकार कर दिया। इसके बाद बिजनौर के अफसरों ने अपने नक्शे से पैमाइश कर दी तो पता चला कि 700 मीटर चौड़ी दस किमी लंबाई तक उत्तराखंड के लोगों का अवैध कब्जा है। अब इस रिपोर्ट को हाईकोर्ट में दाखिल करने की तैयारी की जा रही है।

विज्ञापन


मंडावर क्षेत्र के गंगा खादर में कुंदरपुर टीप, हृदयरामपुर और उत्तराखंड के गांव माहजी टीप, माहजी हृदयरामपुर शेरपुर बेला गांवों के बीच सीमा विवाद चल रहा है। यह कई सालों से यहां पर खूनी संघर्ष का कारण भी बना है। नैनीताल हाईकोर्ट ने दोनों प्रदेश के अफसरों को यहां की पैमाइश के निर्देश दिए थे। जिस पर मंगलवार को दोनों ओर के अफसरों को खादर क्षेत्र में पैमाइश के लिए जुटना था।

एसडीएम सदर मोहित कुमार ने बताया कि बिजनौर की ओर से उनके अलावा तहसीलदार अनुराग सिंह, सीओ सदर, नायब तहसीलदार पुलिस फोर्स के साथ पहुंचे। उत्तराखंड की ओर से केवल नायब तहसीलदार, दो लेखपाल और चकबंदी सीओ ही पहुंचे। पैमाइश पर चर्चा हुई तो नायब तहसीलदार ने वहां के एसडीएम के निर्देश का हवाला देते हुए पैमाइश न कराने की बात कही और चले गए। इस दौरान खूब गहमा गहमी हुई।

विज्ञापन

अपने नक्शे और हद से की पैमाइश बिजनौर के अफसरों ने इसके बाद अपने नक्शे और हद से पैमाइश शुरू की। पैमाइश के बाद पता चला कि नक्शे में जिस जमीन को बिजनौर का दर्शाया गया है, उस पर उत्तराखंड के लोगों का अवैध कब्जा है। एसडीएम सदर मोहित कुमार ने बताया कि इस जमीन की चौड़ाई 700 मीटर और लंबाई दस किलोमीटर है। यह दस हजार बीघा से भी ज्यादा जमीन है। इसका आकलन भी किया जा रहा है। फिलहाल अंतिम रिपोर्ट तक दोनों ओर के लोगों को शांति कायम रखने के निर्देश दिए गए हैं।

हाईकोर्ट के आदेश पर हुई पैमाइश
खादर की इस जमीन पर दोनों ही प्रदेशों के किसान अपना अपना हक जताते रहे हैं। जिसके चलते मामला हाईकोर्ट तक भी पहुंचा। अब हाईकोर्ट के निर्देश पर ही इस जमीन की संयुक्त टीम ने पैमाइश की थी। बिजनौर डीएम उमेश मिश्रा ने हरिद्वार डीएम को भी पत्र लिखा था। वहां से भी एक टीम का गठन कर पैमाइश कराने को पत्र में कहा गया। बिजनौर की टीम तो खादर में पहुंची, लेकिन उत्तराखंड के अफसरों ने इसमें रूचि नहीं दिखाई।
विज्ञापन

बिजनौर के लोग लगा रहे अवैध वसूली का आरोप
खादर की जिस जमीन पर विवाद है, उस पर बिजनौर की ओर के लोग दावा कर रहे हैं कि वहां उत्तराखंड के लोगों का कब्जा है। उस पर अवैध रूप से खेती हो रही है, जिसके नाम पर कुछ लोग लाखों रुपये की वसूली करते आ रहे हैं। वसूली के इसी खेल में इस जमीन से अवैध कब्जा नहीं हटवाया जा रहा है। वहां के कुछ अफसरों के भी इसमें शामिल होने का आरोप लगाया जा रहा है। इसी के चलते पैमाइश से बार बार उत्तराखंड के अफसर बच रहे हैं।

पहले भी हो चुकी रार और फायरिंग
इस जमीन पर पहले भी पैमाइश के लिए टीम पहुंची थी, उस वक्त कुछ किसान असलहा के साथ पहुंचे थे, जिन्होंने फायरिंग कर दी थी। बिजनौर के अफसरों को पीएसी भी ले जानी पड़ी थी। उधर, दोनों ही प्रदेशों के अधिकारियों के बीच इस जमीन को लेकर पहले भी तनातनी हो चुकी है।

बड़े हिस्से पर मिला अवैध कब्जा: एसडीएम
एसडीएम सदर मोहित कुमार ने कहा कि हमने मौके पर पहुंचकर संयुक्त सर्वे की बात कही। हमने अपनी ओर से सर्वे कराया। उत्तराखंड की टीम को उनकी ओर से सर्वे करना था। हमरा सर्वे पूरा हो गया, लेकिन वहां की टीम बिना सर्वे के ही वापिस लौट गई। सर्वे में 700 मीटर चौड़ाई और करीब दस किलोमीटर लंबाई में उत्तराखंड के लोगों का अवैध कब्जा मिला। इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी जा रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें