- बजट में जिले के पर्यटन को नहीं मिली तरजीह
- महात्मा विदुर आश्रम, कण्व आश्रम और अमानगढ़ के लिए थी उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। भले ही बिजनौर में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन प्रदेेश सरकार के बजट में जिले को निराशा हाथ लगी है। दरअसल पर्यटन को बढ़ावा देने की आस भी अधूरी रह गई है। जबकि पड़ोसी जिले में सरकार ने शुकतीर्थ का ध्यान रखा है। जंगल सफारी के लिए अमानगढ़ को भी बजट में जगह मिलने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।
जिले अपना ऐतिहासिक महत्व है, महाभारत सर्किट में शामिल रहा है। महाभारत काल का सैन्य द्वार बिजनौर में सैंदवार गांव को कहा जाता है। गुरु द्रोण का आश्रम भी बिजनौर में ही हुआ करता था। इसके अलावा कण्व आश्रम से लेकर गंगा और मालन की सभ्यता इस जिले के प्राचीन इतिहास को दर्शाने के लिए काफी है। जंगल सफारी की बात करें तो अमानगढ़ रेंज उपयुक्त है। जहां पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन की ओर से प्रयास भी किए गए। बाकायदा अमानगढ़ के द्वार पर्यटकों के लिए खोल दिए गए थे।
उधर जिले का पड़ोसी राज्य उत्तराखंड जहां पर्यटन काफी है। पड़ोसी राज्य के लिहाज से भी बिजनौर में पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता था। अब प्रदेश सरकार ने बजट जारी किया तो पर्यटन के क्षेत्र में जिले को कुछ नहीं मिला। हालांकि पड़ोसी जिले मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ के लिए सरकार ने पिटारा खोला है। जबकि बिजनौर के किसी भी ऐतिहासिक स्थल के लिए कुछ भी नहीं दिया गया।
शिक्षकों व कर्मचारियों को मिली निराशा
अटेवा पेंशन बचाओ मंच उप्र के प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रहास सिंह ने बजट से पेंशन विहीन शिक्षकों एवं कर्मचारियों को काफी उम्मीद थी, लेकिन इससे निराशा ही हाथ आई। सरकार को बजट में पुरानी पेंशन बहाली की मांग को रखते हुए जनकल्याणकारी पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल करना चाहिए था।
घोषणाओं को धरातल पर उतारे
रालोद महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष पूनम चौधरी ने कहा कि पिछले बजट की घोषणाओं को धरातल पर नहीं उतारा गया। पुरानी पेंशन को बहाल नहीं किया गया। वित्तविहीन अध्यापकों का कोई ध्यान नहीं रखा गया।