- वन विभाग और राजमार्ग प्राधिकरण के बीच बनी सहमति
- अब एनओसी के लिए भारत सरकार के पास जाएगा प्रस्ताव
रजनीश त्यागी
बिजनौर। मेरठ-पौड़ी राष्ट्रीय मार्ग में वन्य जीवों का ध्यान भी रखा गया है। इस पर बिजनौर से बैराज के बीच दो वन्य जीव गलियारे बनाए जाने हैं, ताकि वन्य जीव फोर लेने के नीचे से आवागमन कर सकें। इसके लिए दोनों विभागों के बीच सहमति बन गई है और प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है।
मेरठ से नजीबाबाद तक मेरठ-पौड़ी राष्ट्रीय मार्ग को फोरलेन में तब्दील किया जाना है। फिलहाल मेरठ से बहसूमा और बिजनौर-जलालाबाद के बीच फोरलेन पर काम चल रहा है। बहसूमा से बिजनौर तक हिस्सा हस्तिनापुर वन्य जीव अभयारण्य में फंसा होने के चलते निर्माण अभी चालू नहीं हो सका है। एनओसी मिलने के बाद ही बहसूमा से बिजनौर तक हाईवे को फोरलेन में तब्दील किया जा सकेगा। बता दें कि इस हाईवे से हस्तिनापुर वन्य जीव अभयारण्य की जमीन प्रभावित हो रही है। गंगा नदी पर एक और पुल बनाया जाना प्रस्तावित है, वह भी एनओसी के बाद ही बनेगा।
अब एनओसी के लिए वन विभाग और नेशनल हाईवे प्राधिकरण के बीच सहमति बनी है। जिसके लिए दोनों विभागों ने एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें वन्य जीवों और वन संपदा पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम से कम करने के लिए प्रावधान किए हैं। इसी प्रस्ताव में शामिल है दो अंडर पास का निर्माण। बिजनौर शहर से बैराज के बीच ही दो अंडर पास बनाए जाएंगे। जिसमें फोरलेन हाईवे के नीचे से वन्य जीवों को सुगम गलियारा मिल सके। (संवाद)
वन्य जीव संस्थान ने की है स्टडी
फोरलेन हाईवे के यहां से गुजरने को लेकर भारतीय वन्य जीव संस्थान ने स्टडी की है। वन्य जीव संस्थान ने ही वन्य जीवों को कोई नुकसान नहीं होने पाए, इसके लिए उपाय सुझाए हैं। भले ही हाईवे के चौड़ीकरण के बाद यातायात सुगम हो जाएगा, लेकिन इसमें हरियाली भी भेंट चढ़नी है। वन विभाग की मानें तो बिजनौर से बैराज के बीच ही चार हजार पेड़ काटे जाएंगे। इसके बाद ही हाईवे को फोरलेन में बदला जाएगा।
वर्जन::
मेरठ पौड़ी नेशनल हाईवे में दो जगहों पर वन्य जीवों के लिए अंडर पास बनाए जाएंगे। भारतीय वन्य जीव संस्थान की ओर निर्धारित की गई जगहों पर अंडर पास बनाए गए जाएंगे। फिलहाल सहमति बन चुकी है - संतोष वाजपेयी, परियोजना निदेशक