- संविधान सभा के सदस्य थे महावीर त्यागी तथा हिफजुर्रहमान स्योहरवी
- आजादी के आंदोलन में भी बिजनौर के क्रांतिकारियों ने निभाई थी अहम भूमिका
संवाद न्यूज एजेंसी
कोतवाली देहात/बिजनौर। गणतंत्र दिवस यानि भारत के संविधान को लागू किए जाने का दिन...। जिसमें बिजनौर के वाशिंदे भी अपनी भूमिका दर्ज कराने से नहीं चूके। दरअसल जिले के रहने वाले महावीर त्यागी और हिफजुर्रहमान स्योहरवी संविधान सभा में बतौर सदस्य शामिल हुए थे। जिन्होंने संयुक्त प्रांत की ओर से सभा में नेतृत्व किया।
जनपद के गांव रतनगढ़ के रहने वाले महावीर त्यागी और स्योहरा के रहने वाले हिफजुर्रहमान स्योहरवी संविधान सभा के सदस्य रहे थे। दोनों ने संयुक्त प्रांत की ओर से संविधान सभा में प्रतिनिधित्व किया था। महावीर त्यागी ने पहली बार आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग की थी। बता दें कि महावीर त्यागी स्वतंत्र भारत की केंद्र सरकार में भी मंत्री रहे हैं। उनके बार में एक किस्सा मशहूर है कि चीनी से जंग के बाद जब संसद में बहस चल रही थी, तब पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कहा कि जिस जमीन पर चीनी ने कब्जा किया है, वह बेकार और बंजर है। तब महावीर त्यागी ने अपनी टोपी उतारकर गंजा सिर दिखाते हुए जबाव दे दिया था।
भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान खाई थी गोलियां
भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 16 अगस्त 1942 को जनपद के नूरपुर में सैकड़ो क्रांतिकारी एकत्र हो गए थे। जुलूस के रूप में तिरंगा झंडा लेकर क्रांतिकारी नूरपुर थाने की ओर बढ़े। तब अंग्रेज पुलिस द्वारा गोली चला दी गई।इसमें ग्राम गुनिया खेड़ी निवासी परवीन सिंह तथा ग्राम अस्करीपुर निवासी रिक्खी सिंह बलिदान हो गए थे।
ग्राम पैजानिया रहा क्रांतिकारियों की शरणस्थली
वरिष्ठ इतिहासकार भोलानाथ त्यागी बताते हैं कि स्वतंत्रता आंदोलन के समय जब क्रांतिकारियों पर अंग्रेजी हुकूमत की दबिश पड़ती थी तब ग्राम पैजानिया निवासी शिवचरण त्यागी गांव में स्थित अपने घर में क्रांतिकारियों को छुपाते थे। पैजनियाँ में छिपे क्रांतिकारियों में ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खान जैसे क्रांतिकारी शामिल रहे।
आजादी की सुबह पत्थरगढ़ के किले पर फहराया था झंडा
15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिलने की खबर जनपद पहुंची तब जनपदवासियों ने जश्न मनाते हुए नजीबाबाद के निकट स्थित पत्थरगढ़ के किले में एकत्र होकर ध्वजारोहण किया था। कांग्रेस के तत्कालीन जिला अध्यक्ष चंद्रशेखर गोविल के नेतृत्व में हजारों लोगों की भीड़ पत्थरगढ़ के किले पर एकत्र हुई थी। इस दौरान करुणा माहेश्वरी ने ध्वजारोहण किया था। स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े जेपी जाखेटिया, शिवचरण दास जाखेटिया, जगदीश वैश्य आदि शामिल रहे थे।