बिजनौर। देश की स्वतंत्रता के बाद देश को अपना संविधान प्राप्त करने में लगभग 3 वर्ष का समय लगा। भारत का संविधान बनाने के लिए संविधान सभा का निर्माण किया गया था। संविधान सभा में बिजनौर जिले के दो लोग सम्मिलित रहे, जिन्होंने संविधान निर्माण के दौरान जनता के हितों को देखते हुए संविधान सभा में अपने विचार रखे थे। इसलिए गणतंत्र में जिले की दोनों हस्तियों की भी अहम भूमिका मानी जाती है।
देश का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। संविधान सभा में जनपद के ग्राम रतनगढ़ निवासी महावीर त्यागी तथा स्योहारा निवासी हिफजुर रहमान स्योहरवी भी संविधान सभा के सदस्य रहे। महावीर त्यागी ग्राम रतनगढ़ के रहने वाले थे। वह स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे। वह महात्मा गांधी के बेहद नजदीकी रहे। महावीर त्यागी देहरादून में महात्मा गांधी की सभा करा कर अंग्रेजों के निशाने पर आ गए थे। वह कई बार जेल भी गए, लेकिन देश हित के लिए समर्पित रहे। महावीर त्यागी देश की संविधान सभा के सदस्य बनाए गए।
जीवनभर देश के प्रति रहे समर्पित
संयुक्त प्रांत से संविधान सभा के सदस्य रहे महावीर त्यागी के पौत्र हर्षवर्धन आत्रेय बताते हैं कि महावीर त्यागी जीवन भर देश के प्रति समर्पित रहे। वह एक निष्पक्ष और स्वतंत्र न्यायपालिका के पक्षधर रहे। उन्होंने कहा था कि न्याय की जीत ईश्वर की जीत है। आजादी के बाद वह देहरादून से सांसद रहे। वह केंद्र में मंत्री भी रहे।
स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे
हिफजुर रहमान स्योहरवी भी संविधान सभा के सदस्य रहे। वह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तथा मुस्लिम इस्लामिक विद्वान थे। वह स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे। स्योहरा निवासी एम क्यू इंटर कॉलेज के रिटायर्ड प्रवक्ता आफताब अहमद बताते हैं कि हिफजुर्रहमान स्योहरवी देश के विभाजन के बेहद खिलाफ थे। उन्होंने मुस्लिम लीग की नीतियों पर भी आपत्ति जताई थी। वह भारत के प्रति समर्पित रहे। देश की आजादी के बाद वह दो बार अमरोहा से सांसद चुने गए। वह पंडित जवाहरलाल नेहरू के बेहद नजदीकी थे। वह दारुल उलूम देवबंद के महासचिव भी रहे।
इनका भी रहा जुड़ाव
संविधान सभा में उन्होंने संयुक्त प्रांत का प्रतिनिधित्व किया। मेरठ में जन्मे तथा काकोरी कांड में जेल गए विष्णु शरण दुबलिश भी संविधान सभा के सदस्य रहे। विष्णु शरण दुबलिश के पौत्र विनय चौधरी ने बिजनौर में विष्णु शरण दुबलिश विद्यालय की स्थापना की है। विष्णु शरण दुबलिश बिजनौर से जुड़े रहे। उनके परिजन आज भी बिजनौर में रहते हैं।
हिफजर्रहमान स्योहरवी(फाइल फोटो)