अभी तैयारियों की बात करें तो केहरीपुर चौकी पर शौचालय, कैफेटेरिया, पार्किंग, बाउंड्री, प्रवेश द्वार, टिकट बाउंटर बनाने पर काम चल रहा है। जिसे निर्धारित तिथि से पहले तैयार करने की लक्ष्य रखा गया है।
पांच जिप्सी सुबह, पांच जिप्सी शाम को जाएगी: रेंजर
अमानगढ़ रेंजर खुशबू उपाध्याय ने बताया कि पांच जिप्सी सुबह और पांच जिप्सी को शाम के समय जंगल में एंट्री दी जाएगी। इसके अलावा 14 गाइड जुड़े हैं। एक जिप्सी के साथ एक गाइड जाता है। अमानगढ़ के रास्ते भी ठीक कराए जा रहे हैं, ताकि पर्यटकों की गाड़ी आने जाने में परेशानी न हो।
ऑनलाइन बुकिंग भी करा सकेंगे: डीएफओ
डीएफओ अरुण कुमार सिंह ने बताया कि इस बार अमानगढ़ की वेबसाइट भी बना दी गई है। पर्यटकों को इस बार ऑनलाइन बुकिंग कराने की सुविधा भी मिलेगी। पिछली बार यह सुविधा ऑफलाइन उपलब्ध थी। ऐसे में पर्यटकों को बुकिंग फुल होने पर वापिस लौटना पड़ता था। अब ऐसा नहीं होगा। 15 नवंबर से पर्यटन शुरू हो जाएगा। फीस में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
एक लाख बीघा से ज्यादा है अमानगढ़ का रकबा
अमानगढ़ का रकबा एक लाख बीघा से अधिक है। उत्तराखंड बनने से पहले यह जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क का ही हिस्सा था। यहां बाघ, गुलदार, हाथी, चीतल आदि बहुत संख्या में हैं। अमानगढ़ के पास ही पीली बांध है, जहां पर सर्दियों में हजारों प्रवासी पक्षियों का बसेरा रहता है, जो खुद में एक बेहतरीन पर्यटक स्थल है।
अमानगढ़ में विचरता बाघ
- फोटो : amar ujala
अमानगढ़ एक नजर में
रकबा 9580 हेक्टेयर
बाघ 32
गुलदार 45
हाथी 105
चिकारा 06
काला हिरन 50
सांभर 226
बारहसिंगा 37
भालू 9
मोर 1074
नोट: आंकड़े वन विभाग से लिए गए हैं।