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Bijnor News: सामुदायिक शौचालयों की टाॅयलेट शीट धंसी, सबमर्सिबल पंप ठप

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बिजनौर में मोहम्मदपुर देवमल ब्लॉक की पंचायत काजीवाला में अधूरे शौचालयों का निरीक्षण करते डीपीआर
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बिजनौर। जिले को खुलें में शौच मुक्त हुए करीब आठ साल हो गए हैं। ओडीएफ में खूब काम हुए। पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बने। 250000 से अधिक व्यक्तिगत शौचालय का निर्माण हुआ। अब पंचायतों में सामुदायिक शौचालय की टाॅयलेट शीट धंस गई या फिर टूट गई है। दीवारों व छतों में दरार आ गई है। सबमर्सिबल ठप है। शौचालय का निर्माण अधूरे हैं। ग्रामीण शौचालयों का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।
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शासन से जिले को खुले में शौच मुक्त करने के लिए वर्ष 2014 से अभियान शुरू हुआ। जिला वर्ष 2017 में ओडीएफ हो गया। अभियान में 250000 से अधिक शौचालय बने। पिछले चार साल में 50000 से अधिक शौचालय बनने का रिकार्ड बना। डीपीआरओ सतीश कुमार के अनुसार परिवार बढ़ने से शौचालयों की मांग बढ़ी है। आवेदन आनलाइन लिए जाते हैं। करीब 6000 आवेदन का सत्यापन हो रहा है।

1122 पंचायतों में बने सामुदायिक शौचालय
सामुदायिक शौचालयों की साफ-सफाई से लेकर देखभाल तक की जिम्मेदारी पंचायतों की है। देखभाल को केयरटेकर नियुक्त हैं। डीपीआरओ सतीश कुमार के अनुसार जिले में 1123 ग्राम पंचायत है। 1122 पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बन गए हैं। कोतवाली ब्लाक की पंचायत साबूवाला में जमीन का विवाद है। जिससे पंचायत में शौचालय नहीं बना है।
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निरीक्षण में सामुदायिक शौचालय बंद मिले
डीएम उमेश मिश्रा के निर्देश पर पंचायतों के निर्माण कार्य की गुणवत्ता परखने के लिए डीपीआरओ सतीश कुमार ने निरीक्षण किए। निरीक्षण में सामुदायिक शौचालयों बंद मिले। शौचालयों की टाॅयलेट शीट या तो टूट गई है या धंस गई है। कई शौचालयों की दीवारों या छत में दरार मिली। कुछ शौचालय में साफ सफाई बदतर मिली। कहीं सामुदायिक शौचालयों का सबमर्सिबल खराब मिला। शौचालयों का निर्माण पूरे नहीं हैं। पंचायतों में सामुदायिक शौचालय का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। डीपीआरओ के अनुसार इसके लिए सामुदायिक शौचालयों में रजिस्टर रखवा दिए गए हैं। केयरटेकर प्रतिदिन शौचालय इस्तेमाल करने वाले ग्रामीण का नाम दर्ज करता है।


सहायक डीपीआरओ को जांच
सामुदायिक शौचालयों की बदहाली को लेकर प्रधानों के अपने तर्क है। प्रधानों के अनुसार जिस जगह शौचालय बने हैं वहां की जमीन भुरभुरी होने से बैठ गई है। जो पंचायत हाईवे के किनारे है वहां हाईवे के कारण जमीन बैठ गई है। डीपीआरओ सतीश कुमार के मुताबिक पंचायतों के शौचालयों के निर्माण, मरम्मत के लिए अग्रिम बजट दिया गया है। रखरखाव की जिम्मेदारी पंचायतों की है। जहां टाॅयलेट से जुड़ी शिकायत है उनकी पत्रावली की जांच सहायक डीपीआरओ को सौंपी गई है। ठीक नहीं कराने पर कार्रवाई होगी।

अनियमितताओं पर हुई कार्रवाई

डीपीआरओ सतीश कुमार के अनुसार सामुदायिक शौचालय निर्माण व अन्य अनियमितताओं को लेकर 100 से अधिक पंचायत सचिव के खिलाफ निलंबन, सेवा पंजिका में प्रतिकूल प्रविष्टि आदि करीब 150 प्रधानों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, करीब 170 पंचायत सहायक के खिलाफ तथा कंसल्टिंग इंजीनियर के खिलाफ कार्रवाई हुई है। कंसल्टिंग इंजीनियर का दायित्व एस्टीमेट तैयार करना, गुणवत्ता बनाए रखना है।






जिले से मिला इज्जत घर नाम

जिले को ओडीएफ करने का अभियान वर्ष 2014 में शुरू हुआ। जिला 03 साल की मेहनत के बाद ओडीएफ घोषित हुआ। तत्कालीन सीडीओ डॉ इंद्रमणि त्रिपाठी त्रिपाठी ने शौचालयों का नामकरण इज्जत घर किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इज्जत घर नाम पसंद आया। प्रधानमंत्री ने स्वच्छता अभियान के कार्यक्रमों में शौचालयों को इज्जत घर कहकर संबोधित किया। इस संदर्भ में बिजनौर जिले का नाम भी लिया गया।

बिजनौर में मोहम्मदपुर देवमल ब्लॉक की पंचायत काजीवाला में अधूरे शौचालयों का निरीक्षण करते डीपीआर

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