- अप्रैल में एक बाघ झिरना के जंगलों में घायल मिला था, जिसकी उपचार के दौरान हुई मौत
- पांच मई को कालागढ़ टाइगर रिजर्व के नलकट्टा में एक बाघ की मौत हुई
अथर महमूद सिद्दीकी
कालागढ़। कार्बेट के जंगलों में 37 दिनों में तीन बाघ एवं एक बाघिन की मौत हो गई। बाघों एक के बाद एक बाघ की मौत से बाघों के अस्तित्व पर संकट के बादल छा गए हैं।
कार्बेट टाइगर रिजर्व में अप्रैल में एक बाघ झिरना के जंगलों में घायल मिला था, जिसकी मौत उपचार के दौरान 27 अप्रैल को हो गई थी। उसके बाद पांच मई को कालागढ़ टाइगर रिजर्व के नलकट्टा में एक बाघ की मौत हो गई। 19 मई को पाखरो रेंज के वनों में एक बाघिन बीमार हालत में मिली। जिसकी 20 मई को उपचार के दौरान मौत हो गई। आज दो जून को मोरघाटी में भी एक और बाघ की मौत हो गई।
जिनमें नलकट्टा एंव मोरघाटी के बाघ की मौत वन विभाग ने आपसी संघर्ष में बताई। वहीं, झिरना के बाघ एवं पाखरो की बाघिन की मौत बीमारी से हुई। अप्रैल के महीने में कालागढ़ के वनों से एक बाघिन उपचार के लिए रेस्क्यू सेंटर में है। (संवाद)
बाघों की मौत की हो रही जांच
कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों में बाघिन के उपचार के मामले में शासन से जांच की जा रही है। इस मामले से वन विभाग में खासा हड़कंप मचा हुआ है। इसी दौरान शुक्रवार को एक बाघ की और मौत हो गई। कार्बेट टाइगर रिजर्व की दक्षिणी सीमा को कार्बेट प्रशासन संवेदनशील मानता है। बाघों की मौत इसी सीमा के निकट क्षेत्रों में हो रही है। इसको लेकर वन्य जीव प्रेमियों में बाघों के अस्तित्व को लेकर चिंता व्याप्त है। यदि इसी तरह से बाघों के शव मिलते रहे तो बाघों के अस्तित्व पर संकट आ सकता है।