जिले में इस साल मिले सिफलिस के तीन मरीज
बिजनौर। जैसे-जैसे लोगों में जागरूकता बढ़ रही है, वैसे ही बीमारियों की संख्या भी बढ़ रही है। जिले में इस साल अक्तूबर माह तक सिफलिस के तीन मरीज मिले हैं। साल 2018 से अब तक सिफलिस के 28 मरीज मिले हैं।
सिफलिस बैक्टीरिया जनित बीमारी है। चिकित्सकों के अनुसार सिफलिस भी एचआईवी की तरह ही असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित व्यक्ति का खून चढ़ने से फैलता है। जिला अस्पताल के चिकित्सकों की मानें तो जांच कराने पर इसके बारे में पता चलता है। ज्यादातर लोगों को रक्तदान से पहले की गई जांच में इसकी जानकारी हुई। जिला अस्पताल में एक अक्तूबर को लगे रक्तदान शिविर में लोगों ने रक्तदान किया। जिसमें तीन लोग सिफलिस के संक्रमण से ग्रसित मिले।
पांच सालों में मिले सिफलिस के मरीज
साल मरीज
2018-19 12
2019-20 8
2020-21 3
2021-22 2
2022-23 3
(नोट - 2022-23 के आंकड़े अक्तूबर माह तक के दिए गए हैं।)
सिफलिस का इलाज संभव है। अगर शुरूआत में ही इसका पता चल जाए तो एक इंजेक्शन लगने से इसका इलाज हो सकता है। अगर किसी को इंजेक्शन लगने से परेशानी होती है तो उस व्यक्ति को एक सप्ताह तक दवाई दी जाती है। जिला अस्पताल में सिफलिस की निशुल्क जांच, उपचार उपलब्ध है
- डॉ. राजीव रस्तोगी, नोडल अधिकारी सुरक्षा क्लीनिक