20 दिन में नगीना और रेहड़ क्षेत्र में नरभक्षी गुलदार चार लोगों की जान ले चुका है। अब खुद वन विभाग ने भी दो गुलदार के नरभक्षी होने की बात स्वीकार ली है। ऐसे में वन्य जीव विशेषज्ञों की माने तो अगले 48 घंटे घटनास्थल के आसपास पांच से दस किलोमीटर की दायरे में आने वाले गांवों के लोगों के लिए भारी है। यदि समय रहते नरभक्षी को मारा या पकड़ा नहीं गया तो वह इन क्षेत्रों में कहीं पर भी अगला इंसानी शिकार कर सकता है।
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17 जुलाई को अकबराबाद में महिला को नरभक्षी गुलदार ने मार डाला था। इसके बाद यह सिलसिला आगे बढ़ गया और फिर 27 जुलाई को तेलीपुरा, 30 जुलाई को रेहड़ के पास और फिर दो अगस्त को कोतवाली देहात के पास सिंकदरपुर गांव में एक वृद्ध को गुलदार ने मार डाला। सिकंदरपुर में जिस तरह वृद्ध को गुलदार ने खाया, उससे उसकी उम्र आठ से दस साल के बीच होने की अनुमान भी वन विशेषज्ञ लगा रहे हैं। क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला था कि गुलदार ने वृद्ध ब्रह्मपाल को छाती से मांस खाया गया। उसके दिल, लीवर, फेफड़े समेत करीब साढ़े चार किलो मांस भी खा लिया गया।
उसकी सात पसलियां तक नरभक्षी ने तोड़ दी थीं। ऐसे में माना जा रहा था कि गुलदार की पूरी खुराक करीब सात से आठ किलो मांस तक रहती है। ऐसे में पांच किलो मांस खाने पर उसे दोबारा चार से छह दिन में भूख लगने लगती है। नरभक्षी का यह समय अब पूरा हो रहा है। ऐसे में पिछले चार दिनों में यदि नरभक्षी गुलदार ने किसी वन्य जीव का शिकार नहीं किया होगा तो वह अगले 48 घंटे में किसी इंसान को शिकार बना सकता है।
भीड़ से बचकर अकेले इंसान पर करेगा हमला
जिम कार्बेट के रिसर्च स्कॉलर एवं वन्य जीव व्यवहार के विशेषज्ञ जोएल लायेल कहते हैं कि नरभक्षी गुलदार के व्यवहार पर बात करें तो वह सामान्य गुलदार से ज्यादा चतुर हो जाता है। जहां सामान्य गुलदार खड़े हुए इंसानों पर हमला नहीं करते, वहीं नरभक्षी इंसानों को अपना भोजन समझने लगता है। वह भीड़ से बचकर अकेले इंसान को तलाशता है। जहां ज्यादा भीड़ या शोर शराबा होगा, वह उस जगह को छोड़कर दूसरी जगह पर चला जाएगा। ऐसे में जंगल जाने वाले अकेले लोगों पर अधिक खतरा मंडरा रहा है।
समूह बनाकर जंगल जाएं, पहले हांका करें, फिर काम
एसडीओ वन विभाग ज्ञान सिंह ने कहा कि नरभक्षी काफी चतुर है और उसकी तेजी से तलाश भी चल रही है। लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। लोगों को समूह बनाकर जंगल जाना चाहिए। खेत में काम करने से पहले हांका करें और फिर काम करें। इसके लिए वन विभाग ने एडवाइजरी भी जारी की है, उसका पालन करके खुद की सुरक्षा करें।
इन गांवों में नरभक्षी का सबसे ज्यादा खतरा
ग्राम मखवाड़ा, सिकंदरपुर, तेलीपुरा, अकबराबाद, दौलताबाद, अलीपुरा, सुरानगली, माननगर, कुतुबपुर नंगली, राजोपुर, वसी, सराय, गौंसपुर, हीराखेमपुर, बेगमपुर, शादीपुर, हिंदुपुर समेत अन्य कई गांव हैं, जो इस समय नरभक्षी का प्रवास स्थाल हो सकते हैं। माना जा रहा है कि इनमें वह उस गांव में पहुंचेगा या छिपेगा, जहां सबसे कम सर्च ऑपरेशन चल रहा है।