बिजनौर । धरती पर अफसर ही नहीं आसमान में सैटेलाइट से भी धान की पराली व फसल अवशेषों को जलाने की निगरानी होगी। किसान पराली व फसल अवशेष जलाने के बजाए इन्हें सड़ाकर जैविक खाद बनाकर खेती में ही प्रयोग करें। इससे पर्यावरण व जमीन का स्वास्थ्य दोनों ही अच्छे रहेंगे।
बिजनौर जनपद गन्ना बाहुल्य है, दूसरे नंबर पर गेहूं का क्षेत्रफल है। अफजलगढ़, कोतवाली, नजीबाबाद क्षेत्र को छोड़ दें, तो जिले में धान की खेती सीमित क्षेत्रफल में ही होती है। पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए शासन व कृषि विभाग अलर्ट है। पराली जलाने वालों पर निगाह रखने के लिए सैटेलाइट की मदद ली जाएगी। इसमें लगे सेंसर अग्नि जनित स्थल की रोड मैपिंग कर मैसेज के जरिये संबंधित क्षेत्र के सचल दस्तों को संदेश भेजते हैं। इसके बाद दिए गए अक्षांश व देशांतर पर जाकर जांच के बाद उत्तरदायी किसानों के विरुद्ध कार्यवाही की जाती है। इस कार्य में जिले राजस्व, कृषि, ग्राम्य विकास, गन्ना, पंचायत राज, नगरपालिका एवं नगर पंचायतों को जिम्मेदारी दी है।
-पराली जलाने की घटना
कृषि विभाग के अनुसार जनपद में पराली जलाने की घटनाएं वर्ष 2021 में 43, वर्ष 2022 में 25 एवं वर्ष 2023 में 21 घटनाएं घटित हुई हैं। ब्लाॅक अफजलगढ़ में 23, कोतवाली में 17 तथा नजीबाबाद में 12 में फसल अवशेष जलाने की सर्वाधिक घटनाएं हुई हैं। संबंधित घटनाओं की जांच कर कार्यवाही की गई। - पराली का बनाएं खाद
संसाधनों का प्रयोग कर पराली, फसल अवशेषों का खाद बनाएं। इससे खेती व पर्यावरण दोनों से सेहत सही रहेगी। साथ ही जनपद, राज्य व देश को प्रदूषण मुक्त करने में योगदान रहेग। टीमों की निगरानी के साथ सैटेलाइट से नजर रखी जाएगी। - जसवीर सिंह तेवतिया जिला कृषि अधिकारी
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-भूमि में जीवांश कार्बन में होगी वृद्धि
धान की कटाई प्रारंभ हो गई। धान की पराली एवं फसल अवशेषों को जलाने के बजाये, किसान इसे सड़ाकर खाद बनाएं। जिससे भूमि में जीवांश कार्बन में वृद्धि होगी और सूक्ष्म जीव सुरक्षित रह सकेंगें। - गिरीश चंद्र, उप कृषि निदेशक।