रेहड़ के गांव उदयपुर में गुलदार हमले की जानकारी लेते डीएफओ।
- गुलदार की तलाश में जुटी हथिनी सुलोचना के सूज गए दोनों पैर
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संवाद न्यूज एजेंसी
नगीना (बिजनौर)। गांव तेलीपुरा में पिछले बृहस्पतिवार से नरभक्षी गुलदार को पकड़ने के लिए जंगल की खाक छान रही वन विभाग की टीम घटना के छठे दिन बाद भी गुलदार को चिह्नित नहीं कर पाई है। जंगल में ज्यादा चलने से हथिनी सुलोचना के दोनों पैर सूज गए हैं। जिससे हथिनी से होने वाले कांबिंग के कार्य पर भी ग्रहण लगने की संभावना बढ़ गई है।
बृहस्पतिवार की शाम क्षेत्र के ग्राम जलालपुर के जंगल में गए 20 वर्षीय संदीप पर हमला कर गुलदार ने उसे मार दिया था। युवक की मौत के बाद वन विभाग की टीम ने गुलदार को नरभक्षी घोषित करते हुए उसे पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम जंगल में उतार दी। छह दिन के प्रयास के बाद भी किसी भी कैमरे में गुलदार की लोकेशन कैद नहीं हो पाई। पिंजरे के अंदर बकरी बांधना व खुला मांस टांगना भी काम नहीं आया। हालांकि बुधवार को एक जगह गुलदार के पदचिह्न जरूर मिले हैं, जिसकी निशानदेही पर वन विभाग की टीम गुलदार के रास्ते को चिह्नित कर रही है।
बुधवार को दोनों हथिनियों ने तेलीपुरा, जलालपुर व अन्य गांवों में 12 किलोमीटर कांबिंग की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। हथिनी सुलोचना के महावत अय्यूब खान ने बताया कि बुधवार को कांबिंग के बाद जब सुलोचना वापस आई तो उसके दोनों पैर सूजे हुए थे। तत्काल चिकित्सकों के परामर्श पर पैरों की सिकाई की गई। अधिक चलने व आराम न मिलने के कारण पैर सूज गए हैं, जिसके चलते शाम को होने वाली कांबिंग तो नहीं होगी और यदि बृहस्पतिवार तक भी सूजन कम नहीं हुई तो अगले दो दिन कांबिंग का कार्य बंद करना पड़ेगा। उनका कहना है कि यदि सुलोचना कांबिंग के लिए नहीं गई तो डायना भी नहीं जाएगी क्योंकि जंगल में कोई भी हथिनी अकेले नहीं जाएगी।
वन विभाग बिजनौर के एसडीओ ज्ञान सिंह ने बताया कि बुधवार को तेलीपुरा व जलालपुर के गांव में लोगों को गुलदार के हमलों से बचाने व जागरूक करने के लिए पैम्फलेट बांटे गए तथा दीवारों पर चिपकाए गए। उन्होंने बताया कि पुल के पास एक जगह गुलदार के पदचिह्न मिले हैं उसके आधार पर उसकी लोकेशन ट्रेस की जा रही हैं। तेलीपुरा व जलालपुर से गुलदार के हलचल की कोई सूचना अभी नहीं मिली है।