- अब पूरे जिले में पर्यटन चक्र बनाने की तैयारी तेज, शासन को भेजा प्रस्ताव
- टीहरी बांध के प्रशिक्षक बिजनौर के खिलाड़ियों को करेंगे तैयार
- हर वर्ष पीलीबांध पर जलक्रीड़ा प्रतियोगिता कराने की तैयारी शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनाैर। पीली बांध पर जलक्रीड़ा प्रतियोगिता के समापन के साथ ही जिले में पर्यटन के विकास की कहानी प्रारंभ हो गई है। प्रशासन ने इसके लिए शासन को प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है। जहां हर साल पीली बांध पर जलक्रीड़ा प्रतियोगिता और भी बडे़ स्तर पर बनाने की तैयारी है। वहीं, जिले में पर्यटन चक्र तैयार होगा। इस चक्र में जिले की ऐतिहासिक, पौराणिक और प्राकृतिक जगहों को जोड़ा जाएगा। ताकि पर्यटन सप्ताहभर जिले में रहकर घूम सके। उनके रुकने के लिए जल्द ही हैरिटेज होटल भी विकसित कर लिए जाएंगे।
पीलीबांध पर तीन दिनों से जलक्रीड़ा प्रतियोगिता चल रही थी। जिसमें उत्तर प्रदेश के अलावा गोवा, पंजाब, हरियाणा समेत नौ राज्यों के खिलाड़ी पहुंचे थे। जहां खिलाड़ियों ने इस जगहों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए उपयुक्त बताया, वहीं जिले में पर्यटन के विकास का रास्ता और मजबूत हो गया है। अब अमानगढ़ वन्य जीवों को निहारने जाने वाले पर्यटन पीलीबांध में वोटिंग का आनंद भी ले पाएंगे। इसके लिए जल्द ही एक मोटरवोट पीलीबांध का संचालन करने वाले अधिकारियों को उपलब्ध कराई जाएगी।
इस तरह बनेगा पर्यटन चक्र
दिल्ली-एनसीआर से हर सप्ताह हजारों पर्यटन घूमने के लिए उत्तराखंड का रुख करते हैं। ऐसे में उन्हें अब बिजनौर में ही हर तरह का पर्यटन मिल सकेगा। इसके लिए सबसे पहले बिजनौर गंगा बैराज पर पक्षी विहार, डॉलफिन सफारी, इसके बाद पास में कण्व ऋषि आश्रम, विदुरकुटी, नजीबाबाद में पत्थरगढ़ का किला, इको पर्यटन गांव, अमानगढ़ में जंगल सफारी और फिर पीली डैम पर वाटर गेम आदि का आनंद मिलेगा। यह सबकुछ एक दिन में नहीं देखे जा सकेंगे, इसलिए पर्यटकों के यहां रुकने की व्यवस्था ऐसी होगी, ताकि वह यहां पर भी पर्यटन का ही आनंद ले पाएं। इसके लिए साहनपुर, ताजपुर, स्याऊ स्थित पुराने महल को हैरिटेज होटल में बदलने की तैयारी है। इनमें स्याऊ में वर्तमान में विदेशी पर्यटक भी आते हैं।
जंगल में मोर नाचा, सभी ने देखा...
कहावत तो यह है कि जंगल में मोर नाचा किसने देखा, पर पीली बांध पर आयोजित जलक्रीड़ा प्रतियोगिता ने इस कहावत को उल्टा कर दिया। जिला मुख्यालय से 90 किलोमीटर दूर अमानगढ़ के पास पीली बांध पर हुए जलक्रीड़ा ने इस कहावत को उल्टा कर दिया। यहां पर मेले जैसा माहौल रहा। रोजाना हजारों की संख्या में लोग प्रतियोगिताएं देखने पहुंचे। इसके अलावा पूरा पुलिस-प्रशासन भी प्रतियोगिताएं देखने गए थे। तीनों दिन पीली बांधी की बाउंड्री पर हजारों की संख्या को देखी जा सकती है। इनमें आसपास के गांवों से लोग तो पहुंच ही रहे थे, साथ ही दूर-दूर से भी लोग यहां आए हुए थे।
लोग जुड़ते गए, कारवां बनता गया : डीएम
डीएम उमेश मिश्रा ने बताया कि जिले में पर्यटन के विकास को महात्मा विदुर कुटी से शुरुआत की थी। इसके बाद जनसहयोग से पर्यटन के कार्यों को आगे बढ़ाया। असंभव चीजें भी आसान होती गईं और जिले में पर्यटन से जुडे़ कार्य भी परवान चढ़ते गए। पीली बांध पर जलक्रीड़ा बिजनौर में पर्यटन को नया आयाम देगी। हमने शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। अमानगढ़ में इको पर्यटन की तरह ही पीली बांध पर भी पर्यटन शुरू होगा। इससे जिले के लोगों को रोजगार तो मिलेगा ही, साथ ही जिले को नई पहचान भी मिलेगी।