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Bijnor News: रुलाते हैं वहीं, जो लोग हंस कर बात करते हैं...

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गीत गजल संगम एकेडमी की ओर से शेरी महफिल का आयोजन
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उर्दू को बढ़ावा देने वाले शायरों को किया सम्मानित


संवाद न्यूज एजेंसी
नजीबाबाद। गीत गजल संगम एकेडमी की ओर से आयोजित शेरी महफिल में शायरों ने उम्दा कलाम पेश किए। उर्दू अदब की खिदमत करने पर हाजी इखलास और नसीम आलम को शाॅल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। वाहिद जमाल ने कभी आंखें कभी चेहरे बदल कर बात करते हैं, रुलाते हैं वही जो लोग हंस कर बात करते हैं, सुनाकर वाहवाही लूटी।
अदब सिटी कॉलोनी में मास्टर तनवीर अहमद के आवास पर आयोजित शेरी महफिल का आगाज डॉ. इलियास अंसारी के नात-ए-पाक से हुआ। महफिल की शमा तनवीर अहमद ने रोशन की। मुख्य अतिथि नसीम आलम ने कहा कि शेरी महफिलों से उर्दू अदब जिंदा होती है। अभिभावकों से बच्चों को उर्दू तालीम दिलाने की अपील की।
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इसके बाद महफिल में नौशाद अहमद ने सिर्फ मस्जिद में नहीं रहता खुदा, दिल के अंदर भी इसे ढूंढा कर.., मौलाना अकरम ने ये ना पूछो कौन हो क्या हो तुम, मेरे दर्दे दिल की दवा हो तुम.., जफर अहमद ने तुम्हारी यादों को मैंने बहाल रखा है, गमे जुदाई को सीने में पाल रखा है.., आदि कलाम पेश किए।
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महफिल में डॉ. आफताब नोमानी, डॉ. इलियास अंसारी, कमर अख्तर, कारी शाकिर रिजवी, डॉ. नसीम अख्तर, शहबाज अख्तर, हाफिज शादाब, साजिद अहमद, इसरार मुल्तानी, जावेद नूर, मो. साजिद, तसलीम अहमद, नसीम नजीबाबादी, कुमार मोनू रूबा आदि ने भी उम्दा कलाम पेश किए।
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