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Bijnor News: ताकत और भाग्योदय के मिथक के कारण है ऊंची कीमत

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बिजनौर। मिथक और अंधविश्वास के कारण रेड सैंड बोआ सांप की अंतरराष्ट्रीय बाजार में काफी मांग है। मध्य एशिया के लोग भी इससे जुडे़ मिथक से नहीं बचते हैं। विशेषज्ञों की माने तो रेत में रहने वाला शांत स्वभाव का यह जीव लगातार बढ़ती तस्करी के कारण संरक्षण सूची एक में शामिल हो चुका है।
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सैंड बोआ सांप रेत में रहता है और अनाकोंडा से इसकी आंखे मिलती जुलती होती है। यह चूहों के बिल में रहता है और चूहों को और दूसरे सांप को खा जाता है। इंटरनेशनल बाजार में इसकी काफी मांग है।

वन्य जीव विशेषज्ञ जोएल लॉयल कहते हैं कि इस जीव को लेकर मिथक है कि इससे शक्ति वर्धक दवांए बनती है। कुछ लोग अपने देश और विदेश में भी इसे भाग्योदय की चाबी मानते हैं। खासतौर से मलेशिया में इसे लेकर खूब मान्यता है। यही कारण है कि इसकी तस्करी ज्यादा होती है। दोमुआ सांप भी इसे कहा जाता है, इसलिए तस्कर अक्सर इसे डबल इंजन के कोड से पुकारते हैं।
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चीन में तो इसके मांस से दवाएं बनाने का दावा तक होता है। अपने यहां के स्थानीय तस्कर ऐसे लोगों से संपर्क कर इनकी तस्करी करते हैं, जो विदेशी बाजार में इनकी बोली लगा सकें।
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